पवन मल्होत्रा: वो अभिनेता जिसने बेची ब्रेड और लगाई थी झाड़ू, आज बन चुका है फिल्मी जगत का सितारा

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बॉलीवुड में अपनी खास जगह बनाने का हर किसी अभिनेता का सपना होता है लेकिन हर कोई इस दुनिया में अपनी खास जगह नहीं बना पाता। इस क्षेत्र में अपनी खास पहचान बनाने के लिए कई स्टार्स कड़ा संघर्ष करते हैं। आज भी बॉलीवुड में ऐसी कई नाम हैं जिन्होंने इस क्षेत्र में अपनी जगह बनाने के लिए कई मुश्किलों का सामना किया।

ऐसे ही एक अभिनेता हैं पवन मल्होत्रा। पवन ने फिल्मी जगह में अपनी जगह बनाने के लिए कई मुश्किलों का सामना किया और कई बार रिजेक्शन भी मिला लेकिन आज पवन बॉलीवुड का चमकता सितारा बन चुकें हैं। पवन ने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में अपनी एक अलग छाप छोड़ी है। आइए जानते हैं पवन के सफर के बारे में।

झाड़ू लगाने का भी किया था काम

आज हम आपको बॉलीवुड के बेहतरीन कलाकार पवन मल्होत्रा के बारे में बताने जा रहे हैं। पवन का जन्म 25 जुलाई 1958 में हुआ था। पवन के परिवार ने भी विभाजन का दर्द झेला है जिसके बाद वे पाकिस्तान से दिल्ली आकर रहने लगे थे। पवन दिल्ली के राजेन्द्र नगर में ही रहा करते थे। पवन का परिवार पवन से बहुत प्यार करता था क्यूंकि वे सभी भाई बहनों में सबसे छोटे थे।

एक बार पवन का एक दोस्त उन्हें रुचिका थियेटर में ले गया जहां पवन ने अपने दोस्त के कहने पर ही तुगलक नाम के नाटक में भाग लिया। यहाँ पवन ने 6 किरदार निभाए थे जिसके बाद उन्हें ये क्षेत्र काफी अच्छा लगा और उन्होंने इसी क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया। आपको जानकर हैरानी होगी कि पवन के पिता ने अपने बेटे को एक ऑफिस में झाड़ू लगाने के काम पर लगा दिया था क्यूंकि उनका मानना था कि यदि उनका बेटा इस काम को नहीं सीख पाया तो वे जीवन में कुछ नहीं कर सकेगा।

मुश्किल वक़्त में पिता की सीख ने दिया पवन का साथ

इसके बाद पवन ने अभिनय की दुनिया में भी काम करना शुरू कर दिया। लेकिन फिर कुछ समय बाद पवन के पिता ने उन्हें पारिवारिक बिज़नस संभालने के लिए कह दिया जिसके बाद पवन थियेटर से दूर ही हो गए थे। लेकिन 1982 में पवन को फिल्म गांधी की प्रॉडक्शन टीम के साथ काम करने का मौका मिला। वहीं पवन ने 1983 में आई फिल्म जाने भी दो यारों और 1986 में आई फिल्म खामोश में भी प्रॉडक्शन असिस्टेंट के तौर पर काम किया था।

इसके बाद पवन ने मुंबई जाने का फैसला किया। लेकिन पवन के लिए मुंबई में सरवाइव करना आसान नहीं होने वाला था। यहाँ पवन को कई आर्थिक मुश्किलें आईं। 1984 में पवन को “ये जो है जिंदगी” में असिस्टेंट के तौर पर भी काम करने का मौका मिला। लेकिन पैसे बहुत कम मिल रहे थे। इस बीच पवन ने अपने पिता की सीख को याद किया और खुद का गुजारा चलाने के लिए ब्रेड बेचना शुरू कर दिया।

आज बन चुके हैं फिल्मी जगत का चमकता सितारा

इसके बाद 1986 में पवन ने सीरियल “नुक्कड़” में काम किया जिससे पवन को इंडस्ट्री में एक पहचान मिलने लगी। वहीं 1989 में पवन ने सलीम लंगड़े पर मत रो और बाग बहादुर फिल्मों में काम किया। खास बात ये थी कि इन दोनों ही फिल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1997 में पवन ने परदेस फिल्म में काम किया और 2010 में पवन बादशाह कंपनी में भी नज़र आए थे।

इसके बाद पवन ने ब्लैक फ्राईडे में भी काम किया जिसमें पवन ने अपनी दमदार एक्टिंग से दाऊद इब्राहिम और हाजी मस्तान को भी अपना दीवाना बना लिया था। दोनों ने पवन को मिलने का भी आग्रह किया था लेकिन पवन ने इंकार कर दिया।

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