80 वर्षीय दादी ने शुरू किया डॉल मेकिंग का बिज़नस, वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है दादी का नाम

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आमतौर पर 80 वर्ष की उम्र में लोग बिस्तर पकड़ लेते हैं। इस उम्र में लोगों के लिए कोई भी मेहनत का काम करना काफी मुश्किल हो जाता है। लेकिन इसी के विपरीत कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इस उम्र में कुछ नया करने का प्रयास करते हैं। आज ऐसे कई उदाहरण हमारे सामने हैं जिनकी उम्र तो बढ़ रही है लेकिन आत्मविश्वास और हौंसलें अब भी बुलंद हैं। ऐसी ही कहानी है रंजन बेन भट्ट की जो आज 80 वर्ष की उम्र में खुद का बिज़नस कर रही हैं। रंजन बेन बेहद ही सुंदर और आकर्षक डॉल मेकिंग करती हैं। आइए जानते हैं रंजन बेन भट्ट के इस बिज़नस के बारे में कुछ खास बातें।

ऐसे शुरू हुआ ये बिज़नस

हम बात कर रहे हैं गुजरात के सुरेंद्रनगर की रहने वाली रंजन बेन भट्ट के बारे में। आज रंजन बेन अपनी डॉल मेकिंग प्रतिभा से देश विदेशों में खूब प्रचलित हो चुकी हैं। दरअसल बात है 1960 की जब गुजरात की प्रचलित सेविका अरुणाबेन देसाई ने विकास विद्यालय नाम की संस्था को शुरू किया था। इस संस्था का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना था। रंजन बेन ने भी इस संस्था से हैंड एम्ब्रोयडरी, डॉल मेकिंग और सिलाई सीखी। इसके बाद ही रंजन बेन और उनके बेटे ने मिलकर डॉल मेकिंग का बिज़नस शुरू किया। आज रंजन बेन का वर्कशॉप एरिया 2 हज़ार वर्ग फुट में फैला है।

जानिए रंजन बेन द्वारा बनाई गुड़ियों की खासियत

बता दें कि रंजन बेन जो गुड़ियाँ बनाती हैं वे पूरी तरह से हैंडमेड होती हैं। रंजन बेन अलग अलग डिज़ाइन की गुड़िया तैयार करती हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान रंजन बेन ने बताया था कि वे 18 से भी ज्यादा तरह की गुड़िया बनाती हैं। रंजन बेन के पास भारतीय पारंपरिक वस्त्र, भारतीय संस्कृति और अन्य कई थीम की 300 से भी ज्यादा गुड़िया के मॉडल हैं। रंजन बेन ग्राहक को उनकी रुचि के अनुसार ही गुड़िया बनाकर देती हैं।

कई महिलाओं को मिला रोजगार

रंजन बेन और उनके बेटे के इस सराहनीय प्रयास से कई महिलाओं को भी रोजगार मिला है। आज उनके साथ लगभग 20 महिलाएं भी काम करती हैं। सभी को इस काम का प्रशिक्षण दिया गया है। डॉल मेकिंग प्रक्रिया को 14 भागों में बांटकर इसे पूरा किया जाता है। रंजन बेन के मुताबिक एक गुड़िया को बनाने में लगभग 18 घंटे का समय लग जाता है। इस काम के लिए रंजन बेन मशीन का न के बराबर ही प्रयोग करती हैं।

वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज

रंजन बेन ने अपने इस बिज़नस को कलाश्री फ़ाउंडेशन का नाम दिया है। रंजन बेन द्वारा बनाई गई गुड़ियाँ सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी खूब पसंद की जाती हैं। रंजन बेन हर महीने लगभग 500 गुड़ियों को बनाती हैं और 18 देशों में रंजन बेन अपनी इन गुड़ियों को बेचती हैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और पीएम मोदी द्वारा भी रंजन बेन की इस कला को खूब पसंद किया गया है। रंजन बेन का नाम गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और संयुक्त राष्ट्र रिकॉर्ड में भी दर्ज है।

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