हादसे में गंवाए दोनों पैर, सब्जी बेचने वाले की बेटी ने डॉक्टर बन पूरा किया अपना सपना

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कहते हैं कि यदि हौंसलें बुलंद हों तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है। यदि कोशिश की जाए तो किसी भी चीज़ को पाना मुश्किल नहीं होता। आमतौर पर जिंदगी में आई समस्याओं से लोग हार मानकर बैठ जाते हैं लेकिन कई लोग समस्याओं को दर किनार कर सफलता के मुकाम को हासिल करते हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही डॉक्टर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने अपने जीवन में अनेकों मुश्किलों का सामना किया लेकिन कभी हार नहीं मानी। अपने डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए इस लड़की ने हर मुश्किल को पार किया और अपने सपने को पूरा किया। आइए जानते हैं रौशन जव्वाद के बारे में।

ट्रेन दुर्घटना में रौशन ने गंवा दिए थे दोनों पैर

आज हम आपको डॉक्टर रौशन जव्वाद के बारे में बताने जा रहे हैं। रौशन आज अनेकों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। लेकिन अपनी सफलता के मार्ग में रौशन ने अनेकों समस्याओं का सामना किया है। दरअसल 2008 में रौशन अंधेरी से जोगेश्वरी जा रही थी लेकिन तभी वे गलती से ट्रेक पर गिर गई और तभी एक ट्रेन ट्रेक पर आ गई। इस हादसे में रौशन ने अपने दोनों पैरों को गंवा दिया था। लेकिन इसके बावजूद रौशन ने खुद को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।

पिता करते हैं सब्जी बेचने का काम

बता दें कि रौशन के पिता सब्जी बेचते हैं और इसी से रौशन के घर का गुजारा चल पाता है। लेकिन रौशन के पिता ने अपनी बेटी के सपने को पूरा करने के लिए हमेशा संघर्ष किया है। रौशन पढ़ाई में शुरुआत से ही काफी अच्छी थी। रौशन ने 10वीं में भी 92.2% अंकों को हासिल किया था। The Times Of India के मुताबिक जब रौशन MBBS की परीक्षा में पास हुई तब भी उन्हें  दाखिला नहीं दिया गया क्यूंकी नियमों के मुताबिक 70% दिव्यांगता वाले बच्चों को ही दाखिला दिया जाता है लेकिन रौशन 86% दिव्यांग थी। परंतु रौशन ने इसके लिए बॉम्बे उच्च न्यायालय का सहारा लिया और चीफ जस्टिस मोहित शाह ने रौशन के हक में फैसला सुनाया।

इसके बाद भी मुश्किलों ने नहीं छोड़ पीछा

बता दें कि इसके बाद भी रौशन की जिंदगी की मुश्किलें कम नहीं हुई। 2016 में रौशन ने सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई को पूरा कर लिया। 2018 में रौशन ने MD के लिए प्रवेश परीक्षा को पास किया और एमडी की पढ़ाई के लिए दाखिला ले लिया। लेकिन MD की पढ़ाई के दूसरे साल में रौशन को बोन ट्यूमर हो गया। लेकिन फिर रौशन की HOD, शिक्षक और दोस्तों ने मिलकर उनकी सर्जरी कराई। इसके बाद रौशन को MD की डिग्री मिली। अब रौशन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए कुछ नया करना चाहती हैं।

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