दिल्ली के मेट्रो ब्रिज के नीचे चलता है उम्मीदों का स्कूल, जरूरतमंद बच्चों को देता हैं जीने की नई उम्मीद

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आज भी हमारे देश में ऐसे कई बच्चे हैं जिनके लिए शिक्षा पाना बेहद मुश्किल हैं। आज भी कई बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। ऐसे में कई बच्चे शिक्षा के अभाव में गलत राह को चुन लेते हैं। लेकिन इसी के विपरीत कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इन बच्चों के भविष्य को बनाने के लिए सराहनीय प्रयास कर रहे हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो आज जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाने का सराहनीय कार्य कर रहा है। इस शख्स का नाम राजेश शर्मा है। राजेश मेट्रो ब्रिज के नीचे मजदूरों और जरूरतमंद बच्चों के लिए फ्री स्कूल चलाते हैं। आइए जानते हैं इस खबर से जुड़ी खास बातें।

मेट्रो ब्रिज के नीचे चलता है उम्मीदों का स्कूल

आज हम आपको एक खास स्कूल के बारे में बताने जा रहे हैं। ये स्कूल भारत की राजधानी दिल्ली की चमचमाती सड़कों पर बने मेट्रो ब्रिज के नीचे चलाया जाता है। इस स्कूल को राजेश शर्मा चलाते हैं। इस स्कूल का नाम है “फ्री स्कूल अंडर द ब्रिज”। इस स्कूल को उम्मीदों का स्कूल कहना भी गलत नहीं होगा। आज ये स्कूल अनेकों जरूरतमंद बच्चों को जीने की उम्मीद दे रहा है। इस स्कूल में झुग्गी झोपड़ियों और मजदूरों के बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं।

2006 में स्कूल शुरू कर कई बच्चों को दिलाया था दाखिला

इस स्कूल की शुरुआत करने वाले राजेश शर्मा ने NBT से बातचीत करते हुए बताया था कि 2006 में जब यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन बन रहा था तब कई मजदूरों के बच्चे आए थे। काम के सिलसिले में इधर उधर जाकर बच्चों का भविष्य खराब हो जाता है और कोई स्कूल इन बच्चों को दाखिला भी नहीं देता इसलिए राजेश ने अपना स्कूल शुरू करने का फैसला किया। शुरुआत में स्कूल में 2 बच्चे आए लेकिन धीरे धीरे बच्चों की संख्या 140 हो गई। राजेश पास के नगर निगम स्कूल में गए और बात की लेकिन लोगों ने राजेश का मज़ाक उड़ाया लेकिन जब इस स्कूल के प्रिंसिपल ने बच्चों की लगन को देखा तो वे भी दाखिला देने से नहीं रुक पाए।

2010 में वापस से शुरू हुआ ये स्कूल

उस वक़्त राजेश ने 100 से 150 बच्चों का नगर निगम स्कूल में दाखिला करा दिया जिसके बाद कुछ समय के लिए ये स्कूल बंद हो गया। उसके बाद 2010 में राजेश ने एक बार फिर इस स्कूल की शुरुआत करने का मन बनाया। अब इस स्कूल में पहली से 10वीं कक्षा तक के 240 बच्चे आते हैं। आस पास के कई लोग भी बच्चों को पढ़ाने आते हैं जो पढ़ाने के पैसे नहीं लेते। राजेश ने मीडिया को बताया कि सरकार की तरफ से भी यहाँ कई लोग आए और आश्वासन दिया लेकिन वादे जब पूरे होंगे तभी विश्वास किया जा सकता है।

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