कुछ नया करने की चाह में शुरू की मशरूम की खेती, आज कमाई के साथ साथ गाँववालों को बनाया आत्मनिर्भर

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वैसे तो आज भी कई लोगों का यही मानना है कि महिलाएं अपने जीवन में सिर्फ चूल्हा चौका ही कर सकती हैं। लेकिन महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत को सिद्ध कर ऐसा बोलने वालों के मुंह पर ताला लगाया है। महिलाओं ने अपने सराहनीय कार्यों से ये साबित किया है कि आज महिला निर्भर नहीं आत्मनिर्भर है। आज हम आपको एक ऐसी ही महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जो आज मशरूम की खेती कर अच्छी ख़ासी कमाई कर रही है। ये महिला इस कार्य से गाँव वालों को भी आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही है। आइए जानते हैं विनीता के बारे में।

शादी के बाद शुरू की खेती

आज बिहार के बांका के झिरवा गाँव की रहने वाली विनीता अनेकों के लिए मिसाल बन चुकी हैं। विनीता को देखकर कई महिलाएं ज़िंदगी में कुछ बेहतर करने के लिए प्रेरित हो रही हैं। शादी के बाद विनीता ने अपने ससुराल में सभी आवश्यक कार्यों को सीखा लेकिन इसके बाद भी विनीता के मन में कुछ बड़ा और नया करने की चाह थी। इस चाह के चलते ही विनीता ने खेती करने का फैसला किया। विनीता खेती का प्रशिक्षण लेने के लिए कृषि विश्वविद्यालय जाती थी जिसके लिए वे अपने घर से 300 किमी की दूरी तय करती थी।

शुरुआत में करना पड़ा था आर्थिक समस्याओं का सामना

जब विनीता ने खेती करने का सोचा तो कई लोगों ने विनीता को ताने दिए लेकिन विनीता की नज़र सिर्फ अपने लक्ष्य पर थी। विनीता को शुरुआत में आर्थिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ा लेकिन विनीता के पति ने उनका हर कदम पर साथ दिया। धीरे धीरे विनीता इस काम में माहिर होने लगीं । आज विनीता इस काम से महीने में 50 हज़ार रूपये तक की कमाई कर लेती हैं। विनीता ने गाँव में एक प्रयोगशाला भी बनाई है जिसमें स्पोन बनाए जाते हैं। इससे पहले विनीता स्पोन के लिए समस्तीपुर जाती थी।

गाँव वालों को बनाया आत्मनिर्भर

आज विनीता अनेकों किसानों को मशरूम की खेती का प्रशिक्षण देती हैं। अपने इस सराहनीय कार्य से विनीता 20 हज़ार से भी ज्यादा किसानों को मशरूम की खेती का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान विनीता ने बताया कि उनके गाँव में करीब 50 किलो से 2 क्विंटल तक मशरूम का उत्पादन किया जाता है। इस कार्य से गाँव वाले भी आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

सराहनीय कार्य के लिए मिल चुका है पुरस्कार

विनीता के इन सराहनीय कार्यों के कारण उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है। बिहार सरकार के द्वारा भी विनीता को कई पुरस्कारों से नवाजा गया है। कुछ समय पहले विनीता को बिहार सरकार की ओर से जगजीवन राम पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। आज विनीता खुद तो आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और साथ ही साथ अन्यों को भी आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही हैं।

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