RBI गवर्नर के शिक्षक ने आदिवासियों को समर्पित किया अपना जीवन, आज आदिवासियों के बीच बिता रहे जिंदगी 

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गुरु को भगवान का दर्जा दिया जाता है। एक गुरु ही है जो किसी भी विद्यार्थी के जीवन को सही दिशा प्रदान करता है। हालांकि आज के समय में ये वाक्य कितना सार्थक है इस बात को तो नहीं कहा जा सकता लेकिन आज भी ऐसे कई शिक्षक हैं जिनका उद्देश्य सिर्फ विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर उनके भविष्य को उड़ान देना है। आज हम आपको देश के एक ऐसे ही शिक्षक के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका उद्देश्य सिर्फ बच्चों को शिक्षित करना है। ये शिक्षक पिछले कई सालों से आदिवासी बच्चों को शिक्षित करने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं। आइए जानते हैं प्रोफेसर आलोक सागर के बारे में।

RBI के पूर्व गवर्नर के शिक्षक हैं आलोक सागर

आलोक सागर, एक ऐसा नाम जो इस वक़्त खूब सुर्खियों में है। बता दें कि आलोक RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के शिक्षक हैं। आज के समय में किसी भी व्यक्ति का स्तर उसकी शैक्षणिक डिग्रियों से आंका जाता है तो आपको बता दें कि आलोक सागर IIT से पढ़े हुए हैं। IIT से पढ़ने के बाद आलोक ने अमेरिका से मास्टर और पीएचडी की डिग्री को पूरा किया है। इसके बाद आलोक ने कई बड़े संस्थानों में फ़ेलोशिप भी की है। इसके बाद आलोक दिल्ली आकर IIT में प्रोफेसर के पद पर काम करने लगे।

आदिवासियों को समर्पित कर चुके हैं जीवन

आलोक सागर काफी पढ़े लिखे हैं और उनके भाई बहन भी अच्छे पदों पर कार्यरत हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि जब भी आलोक सागर से कोई उनकी डिग्रियों के बारे में पूछता है तो वे इस बात को नकार देते हैं। आलोक को कई भाषाएँ भी आती हैं। आपको बता दें कि अब आलोक सागर अपनी पूरी जिंदगी आदिवासियों को समर्पित कर चुके हैं। पिछले कई वर्षों से आलोक आदिवासियों को शिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।

कैसे आए सुर्खियों में

आलोक सागर वर्ष 1989 से 1990 तक IIT दिल्ली में अध्यापन का कार्य कर रहे थे। लेकिन फिर अचानक ही आलोक ने IIT से नौकरी छोड़ दी। इसके बाद आलोक कहाँ गए किसी को नहीं पता चला। आलोक सुर्खियों में तब आए जब इंटेलिजेंस को आलोक पर शक गया। इसी के बाद जब आलोक की जांच हुई तो आलोक को अपनी डिग्रियाँ दिखानी पड़ी और तब आलोक की असली पहचान सबके सामने आई। आज आलोक मध्यप्रदेश के बैतूल में आदिवासियों को शिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।

अब आलोक आदिवासियों की तरह जीते हैं जिंदगी

आज आलोक आदिवासियों के साथ सादा जीवन ही व्यतीत कर रहे हैं। आलोक आदिवासियों को शिक्षित करने के साथ साथ उनके अधिकारों की भी लड़ाई लड़ते हैं। आज आलोक तीन कुर्ते, एक साइकिल और एक नर्सरी के सहारे जीवन बिता रहे हैं। आलोक ने गाँव में हरियाली लाने का काम भी किया है। आज वाकई आलोक अनेकों के लिए उनकी प्रेरणा बन गई है।

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