राजस्थान के RAS अफसर ने UPSC में मारी बाजी, 13वीं रैंक हासिल कर पूरा किया सपना

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जब से संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा 2020 के परिणाम आए हैं तब से परीक्षा में बढ़िया रैंक हासिल करने वालों और परीक्षा में सफलता पाने वालों के घर लोगों का तांता लगा हुआ है। हर किसी के घर में खुशी का माहौल है। इस परीक्षा में किसी ने पहले प्रयास में सफलता हासिल की तो किसी ने लंबे इंतज़ार के बाद सपने को पूरा किया है। परीक्षा में राजस्थान के गौरव बुडानिया ने 13वीं रैंक हासिल कर राजस्थान का नाम रोशन कर दिया है। खास बात ये है कि गौरव ने हाल ही में राजस्थान प्रशासनिक सेवा में भी सफलता को हासिल किया था। आइए जानते हैं गौरव के इस सफर से जुड़ी कुछ बातें।

IIT BHU से पूरी की इंजीनियरिंग की पढ़ाई

आज राजस्थान में हर किसी की जुबान पर गौरव बुडानिया का नाम है। हर कोई गौरव पर गर्व कर रहा है। गौरव मूल रूप से राजस्थान के चुरू के रहने वाले हैं। गौरव ने 11वीं कक्षा से ही इंजीनियरिंग में दाखिला लेने के लिए JEE की तैयारी करना शुरू कर दिया था। 12वीं के बाद गौरव ने जेईई की परीक्षा को पास किया और उन्हें IIT BHU से पढ़ने का मौका मिला।

ताऊ जी ने किया प्रशासनिक सेवाओं के लिए प्रेरित

गौरव ने IIT BHU से इंजीनियरिंग की डिग्री को हासिल किया और हिंदुस्तान जिंक में उन्हें नौकरी करने का भी अवसर मिल गया। Dainik Bhaskar से बातचीत के दौरान गौरव ने बताया कि गौरव के ताऊ जी श्रवण कुमार बुडानिया ने ही गौरव को बताया था कि किस तरह वे प्रशासन में आकर देश को बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। गौरव ने अपने ताऊ जी की बातों से ही प्रेरित होकर प्रशासनिक सेवाओं में जाने का मन बनाया था।

पहले RAS और अब UPSC में पाई सफलता

अपने ताऊ जी की बातों से प्रेरित होकर गौरव ने प्रशासनिक सेवाओं में जाने की तैयारी करना शुरू कर दिया। गौरव ने राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी शुरू कर दी और उन्हें RAS 2018 में सफलता भी मिल गई। लेकिन गौरव आईएएस बनना चाहते थे। इसलिए गौरव ने यूपीएससी 2020 की परीक्षा दी और उसमें 13वीं रैंक हासिल कर पूरे राजस्थान का नाम रोशन कर दिया।

कई संघर्षों के बाद मिली सफलता

गौरव ने इस सफलता के लिए कड़ा संघर्ष किया है। मीडिया से बातचीत के दौरान गौरव ने बताया कि इस परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्हें कई उतार चढ़ाव का समान करना पड़ा था। गौरव महामारी की चपेट में भी आ गए थे साथ ही उनका परिवार भी बीमार हो गया था। इतना ही नहीं गौरव के प्रेरणा स्त्रोत उनके ताऊ जी का भी इस बीच देहांत हो गया था। इन सबके बीच गौरव को साक्षात्कार की तैयारी के लिए महज 10 से 15 दिन ही मिल पाए। लेकिन गौरव ने अपने आत्मविश्वास और धैर्य से मुश्किल समय को भी पार कर लिया।

परिवार से भी मिला पूरा साथ

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गौरव ने बताया कि उनके परिवार ने इस सफर में उनका पूरा साथ दिया था। परिवार में गौरव के पिता भी एक अध्यापक हैं और उन्होंने गौरव को हमेशा से ही आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। जब गौरव ने बीटेक के बाद एम.ए. करने का फैसला किया तब भी गौरव ने पिता ने उनका खूब साथ दिया। गौरव के मुताबिक गौरव के पिता भी यही चाहते थे कि गौरव अलग अलग विषयों के बारे में पढ़े और उन्हें जाने।

इस प्लान से करेंगे देश की सेवा

गौरव तीन प्राथमिकताओं के आधार पर देश की सेवा करना चाहते हैं। गौरव कहते हैं कि उनकी पहली प्राथमिकता यही होगी कि जो भी उनके पास मदद की गुहार लेकर आएगा वे उसे कभी निराश नहीं लौटने देंगे। इसी के साथ दूसरी प्राथमिकता के तौर पर गौरव शिक्षा में सुधार करना चाहेंगे और गौरव की तीसरी प्राथमिकता बाल एवं महिला अपराधों की रोकथाम होगी।

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