किसी गॉडमदर से कम नही ये महिला, गंभीर बीमारी से संक्रमित बच्चों की करती हैं देखभाल

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आज के समय में ऐसा बहुत कम होता है जब कोई किसी दूसरे की मदद करता है। आज के समय में यदि कोई गंभीर बीमारी से ग्रसित हो तो लोग उसकी ताकत बनने की बजाए उन्हें अपनी बातों से कमजोर कर देते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जो वाकई इंसानियत की मिसाल है। ये महिला किसी गॉडमदर से कम नहीं है। जिन बीमारियों पर खुलकर कभी बात नहीं की जाती ये महिला बरसो से उस बीमारी से ग्रसित मरीजों की देखभाल कर रही है। इस महिला का दूसरों की मदद करने का जुनून और जज़्बा आज 68 वर्ष की उम्र में भी बरकरार है। आइए जानते हैं गॉडमदर मंगल शाह के बारे में।grandmother

मंगल ताई के नाम से जानते हैं लोग

कहानी है एक ऐसी महिला की जो आज अनेकों के लिए उनका सहारा बना चुकी हैं। इस महिला ने कई बच्चों और महिलाओं को नई जिंदगी देने का सराहनीय कार्य किया है। हम बात कर रहे हैं। 68 वर्षीय मंगल शाह की। मंगल शाह को लोग मंगल ताई के नाम से जानते हैं। आज मंगल जरूरतमंदों के प्रति खुद का जीवन समर्पित कर चुकी हैं। मंगल पिछले कई वर्षों से गंभीर बीमारियों से संक्रमित मरीजों की सेवा करती आ रही हैं।

ऐसे शुरू हुआ मदद का ये सिलसिला

दरअसल ये कार्य मंगल ने अपनी शादी के बाद शुरू किया था। 17 वर्ष की उम्र में भी मंगल दूसरों की मदद करने का भाव अपने मन में रखती थी। इसके बाद मंगल ने दिव्यांग, गर्भवती महिलाओं और एचआईवी से संक्रमित मरीजो की मदद करना शुरू कर दिया। एक बार जब मंगल मदद के लिए अस्पताल गईं तब उन्हें महिलाओं की स्थिति के बारे में पता चला कि कैसे महिलाओं के बीमार होने के बाद उनका साथ नहीं दिया जाता। बस इसी के बाद से मंगल ने जरूरतमंदों की मदद करना शुरू किया।

बेहद ही साहसी महिला हैं मंगल

इसके बाद मंगल ने अस्पताल में जरूरतमंद मरीजों के लिए खाना उपलब्ध कराना भी शुरू कर दिया। इसके बाद मंगल ने उन महिलाओं की मदद करने का फैसला किया जो एचआईवी से संक्रमित थी। इस पहल को मंगल ने उस समय शुरू किया था जब इस रोग को सबसे घातक रोग माना जाता था और लोग खुलकर इस रोग पर बात भी नहीं करते थे।

HIV पॉज़िटिव बच्चों के लिए शुरू किया केयर होम

मीडिया से बातचीत के दौरान मंगल ने बताया कि एक बार जब वे लोगों को जागरूक करने के लिए पंढरपुर में गईं तों उन्हें एक ढाई वर्ष और एक डेढ़ वर्ष की बच्चियों के बारे में पता चला जिनके माता पिता की एड्स से मौत हो जाने के कारण उन्हें गौशाला में छोड़ दिया गया। इसके बाद मंगल और उनकी बेटी डिम्पल ने बच्चियों को घर ले जाने का फैसला किया। आज ऐसे ही बच्चों के लिए मंगल पालवी नाम से केयर होम चला रही हैं जहां बच्चों का ध्यान वे खुद रखती हैं।

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