शादी के बाद शुरू की खेती, अब जैविक खेती कर बन गई अन्य किसानों के लिए मिसाल

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आज के समय में ज़्यादातर किसान जैविक खेती की तरफ रुख कर रहे हैं। जैविक खेती से किसान अच्छा खासा मुनाफा भी कमा रहे हैं। इतना ही नहीं कई किसान तो अपने खेतों के लिए खाद भी खुद ही बना रहे हैं और अपने साथ साथ अन्य किसानों को भी आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही महिला किसान के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने शादी के बाद जैविक खेती करना शुरू किया और आज वे अन्य लोगों के लिए मिसाल बन चुकी हैं। आज ये महिला अपने साथ साथ अन्य किसानों को भी आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। आइए जानते हैं रूबी पारिक के बारे में।

राजस्थान की रहने वाली हैं रूबी

आज हम आपको राजस्थान के दौसा की रहने वाली रूबी पारिक के बारे में बताने जा रहे हैं। रूबी आज अनेकों किसानों के लिए उनकी प्रेरणा बन चुकी हैं। रूबी आज जैविक खेती के माध्यम से खेती के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। 2004 में रूबी की शादी ओम प्रकाश पारिक से हो गई। रूबी के मायके में खेती का माहौल नहीं था। लेकिन रूबी का ससुराल खेती पर ही निर्भर था। इसके बाद ही रूबी ने अपने ससुराल की मदद करने के लिए खेती करना शुरू किया।

ऐसे मिला खेती का प्रशिक्षण

दरअसल वर्ष 2008 में रूबी के गाँव में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक आए। ये वैज्ञानिक किसानों को जैविक खेती की ओर प्रेरित करना चाहते थे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिला किसानों को भी आमंत्रित किया गया था। रूबी के पति ने भी रूबी को इस ट्रेनिंग में जाने को कहा ताकि रूबी जैविक खेती के गुर सीख पाए। ट्रेनिंग में रूबी ने बहुत कुछ सीखा। इस ट्रेनिंग में रूबी ने जैविक खेती के महत्व को बखूबी समझा।organic farming

शुरुआत में नहीं हुआ लाभ लेकिन नहीं मानी हार

बता दें कि ट्रेनिंग के बाद रूबी ने 20 बीघा जमीन पर जैविक खेती करना शुरू कर दिया। रूबी ने अपने खेतों में चना, बाजरा ज्वार, मूँगफली, जौ और गेहूं उगाना शुरू किया। हालांकि शुरुआत में रूबी को ज्यादा लाभ नहीं हो पाया लेकिन रूबी ने निरंतर प्रयास जारी रखा। इसके बाद धीरे धीरे रूबी को भी लाभ मिलना शुरू हो गया। इसके बाद रूबी ने 200 मीट्रिक टन की एक कम्पोस्ट यूनिट की भी शुरुआत की। आज रूबी खुद ही खेतों के लिए खाद बनाती है। और यूनिट के कारण पूरे गाँव को वर्मीकम्पोस्ट आसानी से मिल जाता है।

भारत सरकार कर चुकी हैं सम्मानित

इसके बाद रूबी ने अज़ोला का उत्पादन करना भी शुरू किया। अज़ोला को पशुओं के चारे के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अजोला को सूखे चारे में मिलाकर भी पशुओं को दिया जा सकता है। रूबी के सराहनीय कार्य के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा रूबी अन्य किसानों को भी जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रही है और साथ ही किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही है।

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