नौकरी छोड़ शुरू की थी UPSC की तैयारी, अब पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल कर बनी प्रेरणा स्त्रोत

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हाल ही में संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सर्विस परीक्षा 2020 का परिणाम घोषित कर दिया है। इस परिणाम के आने के बाद कई परीक्षार्थियों का सपना पूरा हुआ तो कई परीक्षार्थियों को निराशा हाथ लगी। लेकिन नतीजों में महिलाओं ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है। परिणामों में दूसरा स्थान एक महिला ने ही हासिल किया है। इनका नाम है जागृति अवस्थी। जागृति अवस्थी ने यूपीएससी सीएसई 2020 में पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल कर वाकई कमाल कर दिया है। आज जागृति अनेकों महिला परीक्षार्थियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। लेकिन जागृति और उनके परिवार ने इस परीक्षा के लिए कई त्याग किए हैं। आइए जानते हैं जागृति के संघर्ष भरे सफर के बारे में।

मध्यप्रदेश की बेटी ने UPSC में लहराया परचम

हाल ही में आए UPSC के नतीजों में मध्यप्रदेश के भोपाल के एक गाँव की रहने वाली जागृति अवस्थी ने अपने परिवार का नाम रोशन कर दिया है। जागृति ने यूपीएससी सीएसई 2020 में पूरे देश में दूसरा और महिलाओं में पहला स्थान हासिल किया है। इस सफलता के लिए जागृति ने कई त्याग किए लेकिन आज जागृति की मेहनत रंग लाई है। जागृति की सफलता की खबर सुनकर जागृति के परिवार वालों के फोन की घंटी नहीं रुक रही है। हर कोई उनका मुंह मीठा कर रहा है|

परिणाम पर जागृति को नहीं हुआ था भरोसा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक परिणाम से पहले जागृति अपने घर के झूले पर झूल रही थी। जागृति के मन में परिणाम को लेकर चिंता तो थी लेकिन कहीं न कहीं उन्हें सफलता का अंदेशा भी था। इसके बाद जागृति को परिणाम घोषित होने की सूचना मिली। इसके बाद जागृति ने परिणाम देखा। परिणाम में जब जागृति को उनका नाम दूसरे नंबर पर मिला तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। इसके बाद जागृति ने दो से तीन बार वापस परिणाम देखा और इसके बाद तो जागृति की खुशी का ठिकाना ही नहीं था।

भोपाल से की है स्नातक की पढ़ाई 

जागृति ने मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी भोपाल से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। 2016 में पढ़ाई पूरी होने के बाद जागृति ने गेट की परीक्षा की तैयारी शुरू की और परीक्षा को पास भी कर लिया। इसके बाद जागृति टेक्निकल अफसर के तौर पर नौकरी भी करने लगी। जागृति ने बीएचईएल जैसी कंपनी में भी नौकरी की है। लेकिन सिविल सर्विस को पास कर IAS बनना जागृति का सपना था।

ऐसा रहा UPSC का सफर

बता दें कि जागृति ने यूपीएससी की तैयारी के लिए नौकरी को भी छोड़ दिया था। हालांकि पहले प्रयास में जागृति प्री परीक्षा को भी पास नहीं कर पाई। लेकिन जागृति ने लगातार प्रयास जारी रखा। जागृति दिल्ली में कोचिंग के लिए भी आई थी लेकिन दिल्ली आने के तीन महीने बाद महामारी आ गई तो जागृति को भोपाल वापस जाना पड़ा। इसके बाद जागृति ने घर पर ही तैयारी की और आज परिणाम आपके सामने है।

जागृति और परिवार ने किए कई त्याग

बता दें कि जागृति के पिता एक होम्योपैथी प्रोफेसर हैं और उनकी माता एक स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर थी। जागृति के घर में टीवी तक नहीं है क्यूंकि जागृति के माता पिता नहीं चाहते थे कि उनके बच्चों को पढ़ने में कोई समस्या हो। जागृति के लिए जागृति की माँ ने अपनी नौकरी भी छोड़ दी थी। जागृति ने भी खुद को सोशल मीडिया से दूर रखा था। क्यूंकि सोशल मीडिया का जितना फायदा है उससे कई ज्यादा नुकसान है। जागृति ने 8 से 10 घंटे की निरंतर पढ़ाई की थी। साथ ही जागृति ने हमेशा सकारात्मकता के साथ तैयारी की।

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