शान ओ शौकत की दीवानी थी वो रानी जो 1000 साड़ियाँ और जेवर लेकर निकलती थी सफर पर

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शान ओ शौकत से कौन नहीं रहना चाहता? हर कोई चाहता है कि वे भी राजा महाराजाओं के जैसी जिंदगी बिताए। लेकिन इसके लिए पैसा होना भी बेहद जरूरी है। भारत के इतिहास में ऐसी कई रानी हुईं जिन्होंने एक बेहतरीन जिंदगी को जिया। महंगे कपड़े और महंगे से महंगे जेवरात इन रनियों का शौक हुआ करता था। आज हम आपको एक ऐसी ही रानी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे शान ओ शौकत का बुखार इस कदर था कि वे छोटे से छोटे सफर पर 1000 साड़ियाँ लेकर निकलती थी। साथ ही वे हर कपड़े के साथ के मैचिंग जेवरात और जूते चप्पल भी साथ रखती थी। आइए जानते हैं रानी सीता देवी के बारे में।

बड़ौदा के महाराजा पर आया था रानी सीता देवी का दिल

आज हम आपको रानी सीता देवी के बारे में बताने जा रहे हैं। सीता देवी के चर्चा में होने का सबसे मुख्य कारण उनके जीवन बिताने का स्टाइल रहा है। सीता देवी ने अपने जीवन को शान ओ शौकत के साथ बिताया है। सीता देवी का जन्म 12 मई 1917 को आंध्रप्रदेश में महाराजा सूर्य राव के घर हुआ था। बड़ौदा के महाराजा ने जब सीता देवी को देखा तो वे भी उनसे प्यार कर बैठे लेकिन सीता देवी पहले से ही शादी शुदा था। लेकिन महाराजा से शादी करने के लिए सीता देवी ने पहले पति को तलाक दे दिया था।

पति पत्नी ने फ्रांस जाकर रहने का लिया था फैसला

दरअसल सीता देवी और बड़ौदा के राजा प्रतापसिंह की शादी बेहद ही विवादित थी। इसलिए दोनों ने फ्रांस जाने का फैसला किया था। सीता देवी दुनिया के 8वें सबसे अमीर व्यक्ति की पत्नी बन चुकी थी। सीता देवी का बड़े बड़े लोगों के साथ उठना बैठना था। जहां अब महारानी सर पर पल्ला रखती थी वहीं सीता देवी ने कभी इन बातों को नहीं माना। सीता देवी के पास हीरो का एक हार भी था जिसमे 128.80 कैरट का गुलाबी ब्राजीलियन हीरा और English Dresden हीरा जड़ा हुआ था।

1000 साड़ियाँ लेकर घूमती थी सीता देवी

सीता देवी ने बेहद ही लैविश लाइफ को जिया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि सीता देवी का टंग क्लीनर भी फ्रांस की कंपनी Van Cleef & Arpels द्वारा बना हुआ था। सीता देवी के घर की कालीन भी मोतियों से बनी हुई थी। जब भी सीता देवी सफर पर निकलती थी तो कम से कम 1000 फ्रेंच शिफॉन की साड़ी और मैचिंग जूते व पर्स लेकर निकलती थी।

सीता देवी को बेटे की मौत से लगा था गहरा सदमा

सीता देवी के सम्मान में फ्रेंच फैक्ट्री साड़ी & कॉ. की स्थापना की गई थी जिसे उनके देहांत के बाद बंद कर दिया गया था। सीता देवी के बेटे प्रिंसी ने अपने जन्मदिन पर आत्महत्या कर ली थी जिससे सीता देवी काफी टूट चुकी थी। इसी के चार साल बाद सीता देवी का भी देहांत हो गया।

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