रानी अहिल्याबाई जिसने अंग्रेज़ो की चाल समझी और तुरंत पेशवा को आगाह किया, जानिए इतिहास की कहानी

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भारत का इतिहास बेहद ही रोचक है। इस इतिहास में कई ऐसे शासक हुए जिन्होंने अपनी सूझ बुझ से कई बार अपनी मातृभूमि की रक्षा की। इन शासकों में पुरुषों के साथ साथ महिलाएं भी शामिल हैं। आज भी इतिहास में ऐसी कई महिलाएं हैं जिन्होंने बलिदान देकर भारत की रक्षा की थी। इन्हीं में से एक रानी के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। इस रानी का नाम है अहिल्याबाई होल्कर। अहिल्याबाई को एक बेहतर शासक और राजनीतिज्ञ के तौर पर जाना जाता है। अपनी सूझ बूझ से अहिल्याबाई ने पेशवा को आगाह कर मातृभूमि की रक्षा की थी। आज अहिल्याबाई का नाम भारतीय इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है।

बहुत कम उम्र में हो गया था विवाह

अहिल्याबाई का जन्म अहमदनगर के चोंडी गाँव में हुआ। अहिल्याबाई के पिताजी गाँव के मुखिया थे। अहिल्याबाई के पिता ने अहिल्याबाई को घर पर ही शिक्षित किया था। एक बार मालवा राज्य के पेशवा मल्हार राव होल्कर अहिल्याबाई के गाँव में आराम करने आए तब उन्होंने 8 साल की बच्ची को गरीबों को खाना खिलते हुए देखा। पेशाव बेहद प्रभावित हुए और उस बच्ची का हाथ अपने बेटे खांडेराव के लिए मांग लिया। ये बच्ची अहिल्याबाई ही थी। अहिल्याबाई का महज 8 वर्ष की उम्र में विवाह हो गया था।

कम उम्र में टूट पड़ा दुखों का पहाड़

इसके बाद कुछ समय तक तो ठीक रहा लेकिन 1754 में कुम्भार युद्ध हुआ जिसमें 21 वर्षीय अहिल्याबाई ने अपने पति को खो दिया। पति के साथ ही अहिल्याबाई खुद को सती करना चाहती थी लेकिन उनके ससुर ने ऐसा नहीं होने दिया। कुछ समय बाद अहिल्याबाई के ससुर का भी देहांत हो गया। इसके बाद सत्ता अहिल्याबाई के बेटे मालेराव को सौंपी गई लेकिन 1767 में अहिल्याबाई के बेटे की भी मृत्यु हो गई। अहिल्याबाई पूरी तरह से टूट चुकी थी।

फिर खुद की मातृभूमि की रक्षा

अहिल्याबाई ने अपनी मातृभूमि को बिखरने से रोकने के लिए इंदौर की गद्दी संभाल ली। अहिल्याबाई ने युद्ध में भी अपनी सेना का नेतृत्व किया। 1772 में अहिल्याबाई ने अंग्रेज़ो की चाल को भांप लिया था और तुरंत पेशवा को आगाह कर दिया था। अहिल्याबाई ने करीब 30 वर्ष तक शासन किया। अहिल्याबाई के शासनकाल में व्यापार में बढ़ोत्तरी हुई और साथ ही किसानों को भी आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया गया। 70 वर्ष की उम्र में अहिल्याबाई का देहांत हो गया लेकिन भारतीय इतिहास में उनका नाम हमेशा याद रखा जाता है।

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