बचपन में हो गया पोलियो, नहीं मानी हार, अब पैरालंपिक में पदक से रह गई केवल दो कदम दूर

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 NEW DELHI: कई लोग प्रकृति से मिली चीजों को अपनी जीत और जज्बे से हरा देते है। वह मानते ही नहीं कि ऐसा हो सकता है। 32 साल की सकीना खातून ने भी कुछ ऐसा ही किया। उन्होंने अपनी जिद और जज्बे से पोलियो जैसी बीमारी को भी अपनी मजबूरी नहीं बनने दिया। अब सकीना पर पैरालंपिक में देश को मेडल दिलाने की जिम्मेदारी थी। हालांकि सकीना पदक तो नहीं जीत सकी, लेकिन अपने बेहतर प्रदर्शन के चलते पांचवा स्थान हासिल किया। उन्होंने बिना मेडल जीते भी एक इतिहास कायम कर दिया है। इससे पहले पावरलिफ्टिंग में सकीना राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीत चुकी है।

SAKINA KHATAUN
फोटो / THE HINDU -SAKINA KHATAUN

बेंगलरू के किसान परिवार में हुआ सकीना का जन्म

बेंगलरू के किसान परिवार में सकीना खातून का जन्म 20 जून 1989 को हुआ। उनको बचपन में ही पोलियो हो गया। अपने एक बच्ची को पोलियो होने के कारण परिवार वालों को उनके भविष्य की चिंता सताने लगी। लेकिन सकीना का भविष्य कुछ ओर ही था। उनको बचपन से ही खेलों का शौक था। धीरे धीरे यह शौक जुनून में बदलता गया।

कक्षा बारहवीं के बाद सकिना ने शुरू कर दी पावरलिफ्टिंग

डाक्टरों की सलाह के बाद सकिना ने सर्जरी करवा ली। बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने तय कर लिया कि वह पावरलिफ्टिंग में अपना भविष्य बनाएंगी। इसके लिए उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी। उनकी तैयारियों का परिणाम उनको साल 2014 में राष्ट्रमंडल खेलों में चयनित होकर मिल गया। राष्ट्रमंडल खेल में सकिना ने 88.2 किलोग्राम भार वर्ग उठाकर कांस्य पदक हासिल किया।

लगातार सफलता की सीढिय़ा चढ़ती है सकिना

सकिना राष्ट्रमंडल खेल में पदक जीतने के बाद लगातार सफलता की सीढिय़ा चढ़ती गई। उन्होंने साल 2018 में इंडोनेशिया में जकार्ता में हुए पैरा एशियाई खेल में सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया।

बिना मेडल जीते भी कायम किया इतिहास

अभी तक पैरालंपिक में भारत से कोई पावरलिफ्टर नहीं जाता था। लेकिन पहली बार सकीना खातून की बदौलत कोई पावरलिफ्टर पैरालंपिक का प्रतिनिधित्व करने के लिए गया था। सकिना ने भी पहली बार में ही बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पांचवा स्थान हासिल किया। हालांकि वह पदक से दो कदम दूर रह गई। दुबई में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भी खातून 80 किलोग्राम भार उठाकर 45 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीत चुकी है।

पावरलिफ्टिंग में हर खिलाड़ी को करने होते है तीन प्रयास

पावरलिफ्टिंग में हर खिलाड़ी को तीन प्रयास करने होते है। तीनों प्रयास में सफल होने के बाद वह मेडल जीत लेता है। सकिना खातून ने अपने पहले प्रयास में 90 किलोग्राम वजन उठाया। इसके बाद अगले दो प्रयास मेंं उन्होंने 93 किलो वजन उठाया। 93 किलोग्राम वजन उठाने के बाद वह पांचवे स्थान पर रही। पावरलिफ्टिंग का गोल्ड मेडल चीन की एचयूडी के नाम रहा। उन्होंने 120 किलोग्राम वजन उठाया। वहीं सिल्वर मेडल इज्पिट की खिलाड़ी आर अहमद ने अपने नाम किया। उन्होंने भी 120 किलोग्राम वजन उठाया। लेकिन वह एक प्रयास में असफल रही थी। जिसकी वजह से उनको सिल्वर मेडल ही मिला।

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