पन्ना धाय: एक ऐसी स्त्री जिसने स्वामिभक्ति के लिए दिया था अपने ही पुत्र का बलिदान

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भारत के इतिहास में ऐसी कई वीरांगनाएँ हुई जिन्होंने बलिदान देते हुए दुश्मनों से अपने साम्राज्य की रक्षा की। आज भी ऐसी कई बहादुर महिलाओं के बारे में जानने को मिल जाता है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए कई बड़े बलिदान दिए थे। ऐसी महिलाओं की गाथा को वर्षों वर्ष तक भूला नहीं जा सकता। आज हम आपको एक ऐसी ही वीरांगना के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने स्वामिभक्ति के लिए अपने ही पुत्र को बली चढ़ा दिया था। आज भी इस स्त्री के बलिदान को कोई नहीं भूल पाया है। आज भी इस स्त्री के बलिदान की गाथा इतिहास के पन्नो में दर्ज है। आइए जानते हैं पन्ना धाय के बारे में।

कौन हैं पन्ना धाय

पन्ना धाय हरचंद हांकला की बेटी थी। हरचंद बेहद ही साहसी योद्धा थे। हरचंद एक स्वामी भक्त थे। हरचंद ने राणा संग्राम का कई युद्धों में साथ दिया था। हरचंद की तरह उनकी बेटी पन्ना धाय भी बेहद साहसी थी। जब उदय सिंह ने रानी कर्णावती के गर्भ से जन्म लिया तो उसके बाद रानी काफी बीमार रहने लगी और इसी के बाद पन्ना धाय को उदय सिंह की धाय माँ बनाया गया। इस फर्ज़ को पन्ना धाय ने सत्यनिष्ठा के साथ निभाया।

बनबीर बनना चाहता था चित्तौड़ का राजा

मेवाड़ के राजा की एक कमी थी कि वे किसी पर भी बहुत जल्दी से विश्वास कर लिया करते थे। इसी के चलते राजा के साथ उन्हीं के दरबार के एक शख्स बनबीर ने छल किया। बनबीर चित्तौड़ का राजा बनना चाहता था इसलिए वे राणा संग्राम के वंशजों की बारी बारी हत्या कर रहा था। इसी के चलते अब बनबीर ने उदय सिंह को मारने की योजना बनाई। इसकी भनक पन्ना धाय को लग गई और फिर पन्ना धाय ने जो किया वो वाकई को वीर और साहसी महिला ही कर सकती थी।

पन्ना धाय ने बनाई ये योजना

पन्ना धाय उदय सिंह को किसी भी हालत में कोई नुकसान नहीं पहुँचने देना चाहती थी। इसलिए पन्ना धाय ने उदय सिंह को झूठी पत्तलों से ढक्कर दरबारी के साथ भेज दिया और उदय सिंह की जगह पर अपने बेटे को सुला दिया। इसके बाद बनबीर तलवार लेकर उदय सिंह के कमरे में आया और उदय सिंह समझकर पन्ना धाय के पुत्र को मौत के घाट उतार दिया। बनबीर को शक न हो इसलिए पन्ना धाय ने आँखों से एक भी आँसू नहीं निकालने दिया। इसके बाद उदय को लेकर पन्ना धाय कई जगह गई लेकिन किसी ने पनाह नहीं दी तब आखिर में पन्ना धाय को कुंभलगढ़ में पनाह मिली और यही उदय सिंह बड़े हुए। बाद में उदय सिंह मेवाड़ के राजा बने।

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