इस महिला ने पेश की इंसानियत की मिसाल, अपने अथक प्रयासों से संवार चुकी हैं कई बेसहारा बच्चों का जीवन

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आज हमारे देश में ऐसे कई बच्चे हैं जो बेहद ही गरीब हैं या फिर बेसहारा हैं। ऐसे में इन बच्चों के अच्छे भविष्य की कल्पना भी नहीं की जा सकती। ये बच्चे रोजाना दो वक़्त की रोटी भी अपने लिए बहुत ही मुश्किल से जुटा पाते हैं। ऐसे में इन बच्चों को न तो अच्छी शिक्षा मिल पाती और न ही ये अपने आर्थिक हालातों को सुधार पाते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जो आज ऐसे ही कई बच्चों का भविष्य संवार चुकी हैं। आज ये महिला इन बच्चों को हर बुनियादी सुविधा देने के लिए अथक प्रयास कर रही है। महिला के सराहनीय प्रयास की हर कोई तारीफ कर रहा है। आइए जानते हैं इस खबर से जुड़ी कुछ खास बातें।

बेहद ही प्रेरणादायक कहानी है इस महिला की

आज हम आपको ऋचा प्रशांत के बारे में बताने जा रहे हैं। ऋचा आज अनेकों गरीब और बेसहारा बच्चों के जीवन को सँवारने का सराहनीय प्रयास कर रही हैं। पिछले 12 वर्षों से ऋचा इस सराहनीय कार्य को कर रही हैं। आज कई गरीब और बेसहारा बच्चे ऋचा के प्रयासों के कारण अपनी जिंदगी में आगे बढ़ रहे हैं। आज हर कोई ऋचा के इस प्रयास की तारीफ कर रहा है। आज ऋचा अनेकों लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत भी बन चुकी हैं।

2009 में शुरू किया था ये सराहनीय कार्य

बता दें कि ऋचा ने 2009 में द सुनय फ़ाउंडेशन के नाम से अपना एक संगठन शुरू किया था। शुरुआत में मात्र 6 बच्चे ऋचा के इस संगठन से जुड़े थे जो धीरे धीरे बढ़ते चले गए। आज ऋचा के इस संगठन से 500 बच्चे जुड़ चुके हैं और अपने जीवन को संवार चुके हैं। ऋचा इन बच्चों के लिए वर्कशॉप और सेमिनार का भी आयोजन कराती हैं ताकि बच्चे प्रैक्टिकल ज्ञान भी ले पाएँ। ऋचा अब तक 500 बच्चों को स्कूल में दाखिला दिला चुकी हैं।

बेसहारा और गरीब बच्चों की जिंदगी में लाना चाहती हैं सकारात्मक बदलाव

बता दें कि ऋचा आज इन बच्चों को मुफ्त शिक्षा, यूनिफ़ोर्म, किताबों के साथ साथ मिड दे मील भी देती हैं। आज उनके इस सराहनीय कार्य में 100 लोग भी जुड़े हुए हैं जिनकी उम्र 8 से 80 वर्ष तक की है। ऋचा को उनके परिवार, दोस्त और अन्य फ़ाउंडेशन का भी पूरा साथ मिल रहा है। ऋचा का कहना है कि वे इन बच्चों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाना चाहती हैं। जिससे इन बच्चों को ये न लगे कि वे दूसरों से अलग हैं। ऋचा इन जरूरतमन्द बच्चों को पढ़ाई का वातावरण देना चाहती हैं ताकि ये बच्चे अपनी जिंदगी में आगे बढ़ सके।

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