ये महिला बनी आजाद भारत के सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला जज, आजादी के 39 वर्ष बाद किसी महिला को मिला था ये पद

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महिलाएं चाहे तो क्या नहीं कर सकती इस कथन को भारत की अनेकों महिलाओं ने अपने प्रयासों से सही साबित कर दिया है। आज कोई भी क्षेत्र हो महिलाएं पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही महिला के बार में बताने जा रहे हैं जिसने आजाद भारत के सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज बनकर नारी सशक्तिकरण की मिसाल को पेश किया था। इस महिला ने अनेकों महिलाओं को अपने सपने पूरे करने की प्रेरणा दी है। भारत के इतिहास में इस महिला का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा हुआ है। ये मुकाम हासिल करना इस महिला जज के लिए भी आसान नहीं था। लेकिन उनके मजबूत इरादों से उन्होंने इसे हासिल कर दिखाया। आइए जानते हैं भारत के सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला जज फातिमा बीवी के बारे में।

केरल में हुआ था फातिमा का जन्म

आज हम आपको भारत देश की होनहार महिला फातिमा बीवी के बारे में बताने जा रहे हैं। फातिमा का जन्म 30 अप्रैल 1927 को केरल में हुआ था। फातिमा ने तिरुवनन्तपुरम के लॉ कॉलेज से अपनी पढ़ाई को पूरा किया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि फातिमा की कक्षा में मात्र 5 लड़कियां थी और आने वाले सालों में सिर्फ 3 ही रह गई थी। 1950 में फातिमा ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया की परीक्षा में भी टॉप किया था। साथ ही इस परीक्षा में टॉप करने वाली फातिमा पहली महिला हैं।

कर चुकी हैं कई बड़े पदों पर काम

बार काउंसिल की परीक्षा पास करने के बाद फातिमा ने कोल्लम की निचली अदालत में काम करना शुरू कर दिया। यहाँ एक हिजाबी महिला के लिए काम करना भी आसान नहीं था। इसके करीब 8 वर्ष बाद फातिमा ने केरल के सबोर्डिनेट ज्यूडिशियल सर्विसेज़ में मुंसिफ़ का पद संभाला। इसके बाद फातिमा ने 1968 से 1972 तक केरल के सबोर्डिनेट जज के तौर पर काम किया। इसके बाद 2 सालों तक फातिमा ने बतौर चीफ़ ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट भी काम किया है। इसके बाद फातिमा ज़िला और सत्र न्यायालय की जज बनी और फिर 1980 से 1983 तक इन्कम टैक्स ट्रिब्यूनल की ज्यूडिशियल मेम्बर के तौर पर काम किया।

1989 में बनी सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज

1983 में फातिमा ने केरल के हाई कोर्ट के जज का पद संभाला और उसके बाद 1989 में फातिमा को सुप्रीम कोर्ट के जज के पद पर नियुक्त किया गया। फातिमा पहली महिला थी जिन्हें आजाद भारत के सर्वोच्च न्यायालय में जज के पद पर नियुक्त किया गया था। फातिमा केरल की गवर्नर भी रह चुकीं हैं। सर्वोच्च न्यायालय के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद फातिमा ने तमिलनाडु में बतौर वकील भी काम किया है। फातिमा के बाद महज 6 महिलाएं ही इस मुकाम को हासिल कर पाई हैं।

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