फुटबाल की दीवानी यह लडक़ी फीफा मास्टर प्रोग्राम के लिए सिलेक्ट, पूरे विश्व से आए थे 700 आवेदन

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New delhi  : फुटबाल और बास्केटबाल के दीवाने पूरे विश्वभर है। फुटबाल पूरे विश्व भर में खेले जाने वाला खेल है। इसके चाहने वालों की संख्या करोड़ों में है। एक ही एक फुटबाल प्रेमी केरल की आइशा नाजिया है। आइशा को फीफा मास्टर प्रोग्राम 2021 के लिए सिलेक्ट किया गया है। जिसके लिए पूरे विश्व से 700 आवेदन आए थे। आइशा फुटबाल और बास्केटबाल की दीवानी है। फुटबाल उनको बेहद की पसंद है। स्पोट्र्स के फील्ड में आने के लिए नाजिया ने अपनी अच्छी खासी कॉरपोरेट नौकरी को भी छोड़ दिया।

केरल के कोझीकोड़ की रहने वाली है आइशा

आइशा केरल के कोझीकोड़ की रहने वाली है। आइशा से स्पोट्र्स मैनेजमेंट की डिग्री भी ली है। फुटबाल को लेकर वह बहुत अधिक के्रजी है। लिजेंड फुटबाल खिलाड़ी किस तरह से अपना होमवर्क करते है। अपने आपको इंप्रूव करने के लिए क्या क्या करते है। आइशा इन सब पर नजर रखती है। आइशा इकलौती भारतीय महिला है। जिसको फीफा ने मास्टर कोर्स के लिए चुना है। यहां तक पहुंचना आसान बात नहीं थी।

चेन्नई में हुई आइशा की स्कूलिंग

आइशा की स्कूलिंग चेन्नई में हुई। आइशा जब छोटी थी तो उनके माता पिता ने तलाक ले लिया था। उनकी मां ने दूसरी शादी कर ली। आइशा अपेन सौतेले पिता के साथ रहती है। आइशा स्कूली समय से ही टॉपर रही। उन्होंने सभी क्लास में अच्छे माकर्स हासिल किए। अच्छे अंक लाने के कारण उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग को लेकर आठ लाख रुपए की स्कॅालरशिप भी मिली। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग कोलाम के टीकीएम इंजीनियरिंग कॉलेज से की।

इंडियन ऑयल में मैकेनिकल के रूप किया नियुक्त

पढ़ाई पूरी करने के बाद आइशा को मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में कोच्ची में इंडियन ऑयल अडानी में नौकरी मिली। नौकरी करते हुए आइशा फुटबाल को लेकर हमेशा उत्साहित रहती थी। वह तीन फुटबाल विश्व कप देख चुकी थी। उनकी रूचि स्पोट्र्स में बढ़ती जा रही थी। वह खाली एक मौके का इंतजार कर रही थी।

साल 2017 में आइशा की जिंदगी में आया नया मोड़

साल 2017 में आइशा की जिंदगी में एक नया मोड़ आया। इसी साल फीफा ने अंडर-17 विश्व कप को भारत में आयोजित कराने का निर्णय लिया। यहीं से आईशा की जिंदगी में भी एक नया मोड़ आ गया। आइशा ने भी स्पोट्र्स मैनेजमेंट अधिकारी बनने को लेकर अप्लाई कर दिया। आइशा बताती है कि उस समय उनके पास कोई डिग्री भी नहीं थी। लेकिन उनको अपनी दूसरे स्किल पर विश्वास था। मैंने अपना इंटरव्यू पास कर लिया। मैं वर्कफोर्स मैनेजर के पद पर नियुक्त हो गई। 23 साल की उम्र में यह मेरी स्पोट्र्स में पहली नौकरी थी।

चीफ आफ डिपार्टमेंट की तरह था यह पोस्ट

आइशा बताती है कि यह पोस्ट एक तरह से चीफ आफ डिपार्टमेंट की तरह था। यहां पर मुझे सभी डिपार्टमेंट को लीड करना था। सभी डिपॉर्टमेंट मे अलग-अलग क्षेत्र से लोग आए हुए थे। मुझे सबसे तालमेल बनाकर उनको अपने साथ लेकर चलना था। यह काम मैने बेहतरीन तरीके से किया। इसके बाद मेरे भीतर काफी आत्मविश्वास पैदा हुआ।

एनबीए टीम का भी हिस्सा बनी आइशा

आइशा बताती है कि जब एनबीए (नेशनल बास्केटबाल एसोसिएशन) ने इंडिया में काम करना शुरू किया तो मुझे भी उनके साथ काम करने का मौका मिला। वह बताती है कि उनकी टीम में 200 अमेरिकन थे। वह बताती है कि यह बिल्कुल अलग तरह का अनुभव था। हमे बास्केटबाल को भारत में बढ़ावा देना था। स्पोट्र्स फील्ड में रेगुलर रहने से आइशा ने अपने इंडियन ऑयल के जॉब को छोड़ दिया। आइशा कहती है कि मैं अपने कॅरियर को लेकर काफी फोकस थी। मैं एक ही समय कई जगह जुड़ी हुई थी।

मैंटली के साथ फिजिकल फिट भी रखता है स्पोट्र्स

आइशा कहती है कि स्पोट्र्स की फील्ड में आप डेस्क पर बैठकर काम नहीं कर सकते। आपको काम को गहराई से करने के लिए स्टेडियम में जाना होगा। वह कहती है कि कई बार काम के दौरान उनको झुलसती गर्मी में 500 बार स्टेडियम में आना जाना पड़ता था। वह कहती है यह भी एक कारण है कि महिलाएं इस फील्ड में अपना कॅरियर कम ही बनाती है।

साल 2015 में फीफा मास्टर कोर्स के बारे में था सुना

आइशा कहती है कि साल 2015 में उन्होंने फीफा मास्टर कोर्स के बारे में पहली बार सुना था। यह एक साल का प्रोग्राम था। इंटरनेशनल सेंटर फॉर स्टडीज द्वारा यह कोर्स करवाया जा रहा था। वह बताती है कि यह कोर्स डीए मोंटफोर्ट यूके, एसडीए बोकानी आफ स्कूल मैनेजमेंट इटली, यूनिवर्सिटी आफ न्यूचैटेल स्विट्जरलैंड में कराया जा रहा था।

कोर्स खत्म होने के बाद तीन लोगों का होगा चयन

आइशा बताती है कि मास्टर प्रोग्राम करने के बाद उनके लिए नए दरवाजे खुलेंगे। वह कहती है फीफा 80 जगहो से जुड़ा हुआ है। जिसमें फार्मूला वन रेस, आईओसी कमेटी सहित अन्य कई चीजे शामिल है। वह कहती है कि महिलाएं अपने सभी सपनों को पूरा कर सकती है, बस उनको पूरा करने के लिए उनके भीतर जुनून होना चाहिए।

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