77 वर्षीय ये महिला कर रही भारत के सबसे पुराने मार्शल आर्ट के प्रति लोगों को जागरूक, मुफ्त में सिखाती हैं कला

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आज आधुनिकता के समय में लोग नए-नए कौशल तो सीख रहे हैं लेकिन इसी के विपरीत अपने ही देश की पुरानी कलाओं को भूलते जा रहे हैं। आज भारत की पुरानी कलाओं को लोगों के बीच बहुत ही कम देखा जाता है। लेकिन भारत में एक महिला ऐसी हैं जो आज 77 वर्ष की उम्र में भी भारत की पुरानी मशाल आर्ट कला के प्रति सभी को जागरूक कर रही हैं। आज ये महिला अपने अथक प्रयासों से भारत के सबसे पुराने मार्शल आर्ट को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। आज हर कोई इस महिला की तारीफ कर रहा है। बेहद ही प्रेरणादायक है मिनाक्षी अम्मा की कहानी। आइए जानते हैं मिनाक्षी अम्मा से जुड़ी कुछ बातें।

केरल की रहने वाली हैं मिनाक्षी अम्मा

आज हम आपको केरल वाटकारा की रहने वाली मिनाक्षी अम्मा के बारे में बताने जा रहे हैं। अम्मा आज अनेकों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन चुकी हैं। 77 वर्षीय मिनाक्षी आज भारत की पुरानी कला को जन-जन तक पहुंचाने का सराहनीय कार्य कर रही हैं। इसके लिए मिनाक्षी भारत की सबसे पुरानी मार्शल आर्ट की कला कलारीपायट्टू को सिखाती हैं। खास बात तो ये है कि मिनाक्षी ये कला अपने विद्यार्थियो को मुफ्त में सिखाती हैं। आज हर कोई मिनाक्षी अम्मा के इस प्रयास से बेहद प्रेरित हो रहा है।

Meenakshi

7 वर्ष की उम्र में सीखनी शुरू की ये कला

मिनाक्षी ने महज 7 वर्ष की उम्र में इस कला को सीखना शुरू किया था और उनके पिता ने भी उन्हें इस कला को सीखने से कभी नहीं रोका था। इसके बाद मिनाक्षी की शादी एक स्कूल टीचर से हुई थी। शादी के बाद मिनाक्षी ने अपने एक ट्रेनिंग स्कूल की शुरुआत की जहां से वे इस कला को अपने विद्यार्थियों तक पहुँचाती हैं। महज 17 वर्ष में मिनाक्षी ने दूसरे बच्चों को इस कला का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया था। मिनाक्षी से प्रभावित होकर उनके बच्चों ने भी बचपन में ही इस कला का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया।

Meenakshi Amma

अपने विद्यार्थियों को मुफ्त में सिखाती हैं ये कला

बता दें कि मिनाक्षी साड़ी में इस कला का अभ्यास करती हैं। उनके ट्रेनिंग स्कूल में ज़्यादातर लड़कियां इस कला को सीखने के लिए आती है जिसमें 6 वर्ष से 26 वर्ष तक की लड़कियां शामिल हैं। मिनाक्षी सभी विद्यार्थियों को मुफ्त में इस कला का अभ्यास कराती हैं। हर साल के अंत में विद्यार्थी अपनी मर्ज़ी से जो चाहे वो गुरु दक्षिणा देते हैं। मिनाक्षी के विद्यार्थी भी इस कला को सीखने के बाद इसे अन्यों तक पहुंचा रहे हैं। मिनाक्षी को उनके सराहनीय कार्यों के लिए पद्मश्री से भी नवाजा जा चुका है।

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