छोटे छोटे दुकानदारों बने सैकड़ों बीघा जमीन के मालिक, पैन कार्ड की वजह से चढ़े टैक्स विभाग के हत्थे

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NEW DELHI  : उत्तर प्रदेश में छोटे छोटे दुकानदारों ने करोड़ों रुपए की प्रापर्टी खरीदकर उसके मालिक बन गए। कानुपर के दुकानदारों ने अभी तक 375 करोड़ रुपए की प्रापर्टी खरीद ली। कानपुर में बिग डेटा साफ्टवेयर, आयकर विभाग और जीएसटी रजिस्ट्रेशन में इस बात का खुलासा हुआ है। जांच में जानकारी मिली है कि पान, खस्ते, चाट और समोसे का ठेला चलाने वाले सैकड़ो व्यापारी की करोड़ों की संपत्ति है। जांच के हैरानी वाली बात भी सामने आई है कि छोटेे छोटे किराना मालिक भी करोड़पति है।

अलग-अलग जगहों पर खरीदी करोड़ों रुपए की प्रापर्टी

जांच में सामने आया कि प्रापर्टी खरीदने के दौरान इन लोगों ने जीएसटी रजिस्ट्रेशन को लेकर एक भी पैसा नहीं दिया है। यह संपत्तियां आर्यनगर, स्वरूप नगर, बिरहाना रोड, हूलागंज, पीरोड, गुमटी जैसे महंगे कमर्शियल इलाके में खरीदी है। दक्षिण कानपुर में रिहायशी इलाकों में भी इन्होंने जमीन खरीदी है। इन्होंने 30 करोड़ से अधिक की केवीपी खरीदी है। वहीं यह 650 बीघा कृषि जमीन के मालिक भी बन गए। यह जमीने कानपुर देहात, कानपुर नगर के ग्रामीण इलाको बिठूर, नारामऊ, मंधना, बिल्हौर, ककवन, सरसौल से लेकर फरुखाबाद तक खरीदी गई है।

दो पान की दुकान चलाने वालो ने खरीदी करोड़ों रुपए की प्रापर्टी

जांच में यह भी सामने आया है कि दो पान की दुकान चलाने वालों ने करोड़ों रुपए की प्रापर्टी खरीदी है। मालरोड का खस्ते वाला अलग-अजग ठेलो पर हर माह सवा लाख रुपए किराया दे रहा है। स्वरूप नगर, हूलागंज के दो खस्ते वालो ने दो इमारत खरीद ली। लालबंगला का एक और बेकनगंज के दो कबाडिय़ों ने तीन संपत्तियां दो साल में खरीदी। जिसकी कीमत मार्केट में करोड़ो रुपए से अधिक है। बिरहाना रोड, मालरोड, पी रोड, के चाट व्यापारियों ने जमीन पर खासा निवेश किया है। जीएसटी रजिस्ट्रेशन से बाहर छोटे किराना व्यापारियों और दवा व्यापारियों की संख्या 65 से अधिक है। इन्होंने करोड़ों का निवेश किया।

अलग अलग रिश्तेदारों के नाम से कराया रजिस्ट्रेशन

आयकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक कमाई अधिक होने पर निवेश के रास्ते तलाशता है। ठेले वालो की कमाई अधिक होती है उनके खर्च कम होते है। पैसा किसी की नजरों में न आए इसलिए उन्होंने चालाकी दिखाते हुए अलग-अलग नाम से जमीन के रजिस्ट्रेशन करवाए। प्रापर्टी में अधिकतर निवेश भाई, भाभी, चाचा, मामा के नाम से कराया। लेकिन एक गलती करते हुए पेन कार्ड अपना लगा दिया। जिससे उनकी पूरी कलई खुल गई।

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