अरबपति ने खोले स्पेस टूरिज्म के रास्ते, साथी एयरोनॉटिकल के साथ मिलकर की अंतरिक्ष की यात्रा, अगले साल 600 यात्री करेंगे अंतरिक्ष का सफर

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NEW DELHI : अंतरिक्ष आम लोगों के लिए रहस्य का विषय बना हुआ है। लेकिन अब जल्द ही अंतरिक्ष का भी रहस्य सुलझने वाला है। अरबपति बिजनेसमैन रिचर्ड ब्रैसनैन ने अपने बचपन के सपने को पूरा करते हुए स्पेस टूरिज्म के रास्ते को खोल दिया है। उनका यह सपना 71 साल की उम्र में पूरा हुआ है। अपने सपने को पूरा होने पर वह इतना खुश थे कि उन्होंने अपने साथी एयरोनॉटिकल शिरिषा बांदला को कंधे पर उठा लिया। अब अगले साल 600 यात्री स्पेस का सफर करेंंगे।

22 अंतरिक्ष यान ने भरी सफल उड़ान

वर्जिन गैलिक्टक के 22 अंतरिक्ष यान ने स्पेस की सफल उड़ान भरकर पूरी तरह से इतिहास रच दिया। इस उड़ान के साथ ही प्राइवेट टूरिज्म के रास्ते खुल गए। अब भविष्य में भी लोग स्पेस में जा सकेंगे। आम आदमी भी टूरिस्ट की तरह अंतरिक्ष की सैर कर सकेगा।

अपने बाकी साथियों के साथ भरी अंतरिक्ष की उड़ान

रविवार को वर्जिन गैलेस्टिक के माकिल रिचर्ड ब्रैसनेन ने अपने साथियों के साथ मिलकर अंतरिक्ष की उड़ान भरी। इस दौरान रिचर्ड ब्रैसनैन के साथ एयरोनॉटिकल शिरिषा बांदला भी मौजूद थे। उनके अन्य साथी भी इस दौरान मौजूद थे। इस यात्रा में अरबपति के साथ सात लोग शामिल थे। इस अंतरिक्ष यान ने न्यू मैक्सिको से उड़ान भरी थी।

बचपन में देखता था अंतरिक्ष में जाने का सपना

यात्रा के बाद रिचर्ड ब्रैसनेन ने बताया कि वह बचपन में ही अंतरिक्ष में जाने का सपना देखते थे। अंतरिक्ष उनके लिए एक सपने की तरह था। फिर 17 साल पहले फैसला किया कि मैं स्पेस ट्रैवलर जरूर बनूंगा। इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी। अब उन्होंने स्पेस टूरिज्म के रास्ते खोल दिए।

यह होती है सब ऑर्बिटल उड़ान

सब आर्बिटल उड़ान का मतलब होता है कि आपका यान अंतरिक्ष में तो पहुंच जाएगा लेकिन कक्षा में प्रवेश नहीं करेगा। वह कक्षा को छूकर आ जाएगा। इसको सबआर्बिटल उड़ान कहा जाता है। इसमें आप कुछ समय के लिए भारमुक्त हो जाएंगे। रिचर्ड बैसनेन ने 17 साल पहले वर्जिन गैलेस्टिक कंपनी बनाई थी। राकेट पावर्ड वीएएसस को यूनिटी स्पेसशिप में लेकर गया था। एयरक्राफ्ट ने 50 मील दूर धरती से 15 किलोमीटर ऊपर जाकर स्पेसशिप को हवा में छोड़ दिया।

वीएएस स्पेसशिप ने शुरू किया अपना इंजन

धतरी से 15 किलोमीटर दूर पहुंचने के बाद वीएसएस स्पेसशिप ने अपना इंजन शुरू किया। वह अंतरिक्ष की ओर चढ़ गया। फिर आगे जो हुआ इतिहास बन गया। अब अंतरिक्ष यात्री स्पेस में सुंदर नजारे ले रहे थे। कुछ समय बाद वीएसस स्पेसशिप धरती पर लैंड हो गया।

शिरिषा बांदला बनी तीसरी महिला यात्री

शिरिषा बंादला अंतरिक्ष की यात्रा करने वाली भारतीय मूल की तीसरी यात्री बन गई। इससे पहले कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स के नाम यह उपलब्धियां दर्ज है। लेकिन भारत के नाम से अंतरिक्ष में जाने की उपलब्धि केवल राकेश शर्मा के नाम ही दर्ज है। बांदला का जन्म आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में हुआ। जबकि उनका पालन पोषण अमेरिका में हुआ। उन्होंने वर्ष 2011 में पुर्डे यूनिवर्सिटी के स्कूल आफ एयरोनॉटिक्स से विज्ञान में ग्रेजुएशन किया। साल 2015 जार्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री ली।

अगले साल से शुरू हो सकता है स्पेस टूरिज्म

कंपनी के अनुसार वह अगले साल से ही स्पेस में टूरिज्म भेजना शुरू कर देगी। इससे पहले यह कंपनी तीन टेस्ट और शुरू करेगी। यह टेस्ट साल 2021 तक पूरे हो जाएंगे। कंपनी इसके पहले ही 600 टिकट बेच चुकी है। यह इच्छुक लोग 60 अलग-अलग देशों से है। आने वाले समय में हर साल 400 फ्लाइट जाने का अनुमान है।

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