छोटे होने के बावजूद पदक लाने में बड़े है हरियाणा और पंजाब, खिलाडिय़ों पर दिल खोलकर खर्च करती है सरकार

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NEW DELHI  : टोक्यो ओलंपिक शुरू हो चुका है। ओलंपिक में भारत की शुरुआत भी काफी शानदार हुई है। भारत ने हाकी में न्यूजीलैंड को हराकर अपना पहला मैच जीत लिया है। ओलंपिक में 127 खिलाडिय़ों का दल हिस्सा ले रहा है। ओलंपिक में गौर करने वाली बात यह है कि इसमें केवल दो राज्यों के खिलाडिय़ों में पदक की सबसे अधिक दावेदारी होती है। इन राज्यों में हरियाणा और पंजाब शामिल है।

ओलंपिक में भारतीय दल में होते है इन दो राज्यों के 40 प्रतिशत खिलाड़ी

ओलंपिक में भारतीय दल में सबसे अधिक हिस्सेदारी हरियाणा और पंजाब की है। जबकि यह राज्य जन्संख्या और क्षेत्रफल दूसरे कई राज्यों से काफी छोटे है। कुल 127 खिलाडिय़ों में से हरियाणा के 31 और पंजाब के 19 खिलाड़ी है। इन दो राज्यों की हिस्सेदारी भारतीय दल में 40 प्रतिशत है। वहीं पदक भी इन दो राज्यों के खिलाड़ी सबसे अधिक जीतते है। वहीं जनसंख्या के हिसाब से देखा जाए तो उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत है। लेकिन उत्तर प्रदेश के खिलाडिय़ों की मेडल संख्या भी काफी कम रहती है। यूपी के आठ खिलाड़ी ही ओलंपिक में क्वालीफाई कर पाए है। जबकि हरियाणा की ओर से महिला हाकी के नौ, कुश्ती के 7 और बाक्सिंग के 4 और शूटिंग के भी 4 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे है। वहीं पंजाब में पुरुष टीम के 11 खिलाडी महिला हाकी टीम के 2, निशानेबाजी के 2 और बाक्सिंग का एक और एथलेटिक्स के 3 खिलाड़ी खेल जगत में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

क्षेत्रफल में छोटे होने के बावजूद खेलो में सफल

क्षेत्रफल में हरियाणा और पंजाब काफी छोटे है। लेकिन इन दोनों राज्यों से पदक सबसे अधिक निकलते है। केवल ओलंपिक नहीं हर खेल में इन दो राज्यों के खिलाड़ी सबसे आगे रहते है। दूसरे राज्यों में खिलाडिय़ों के आगे नहीं निकल पाने का कारण सरकारे भी है। जनसंख्या के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। वहां पर खेल बजट केवल 255 करोड़ रुपए है। जबकि जनसंख्या और क्षेत्रफल में छोटा होने के बावजूद उत्तर प्रदेश का खेल बजट 37 प्रतिशत अधिक है। यह हाल तब है जब हरियाणा की जीडीपी नौ लाख करोड़ है। जबकि उत्तर प्रदेश की जीडीपी कही ज्यादा 20 लाख करोड़ है।

खिलाडिय़ों पर दिल खोलकर खर्च करती है दोनों राज्यों की सरकारे

राजस्थान की सरकार ओलंपिक में मेडल जीतने वाले खिलाडिय़ों को तीन करोड़ रुपए देती है। तो हरियाणा सरकार ओलंंपिक में मेडल जीतने वाले खिलाड़ी को छह करोड़ रुपए का इनाम देती है। ऐसे में हरियाणा सरकार की पुरस्कार राशि दो गुना है। हरियाणा में ओलंपिक की तैयारियों को लेकर 15 लाख रुपए मिलते है। वहीं राजस्थान में इसी तैयारी के नाम पर सिर्फ पांच लाख रुपए मिलते है। इतना ही नहीं हरियाणा में मेडल जीतने वाले खिलाड़ी के कोच को भी 20 लाख रुपए दिए जाते है। जबकि राजस्थान सहित दूसरे राज्यों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। खिलाडिय़ों की ट्रेनिंग के लिए हरियाणा में 22 सेंटर है। जबकि राजस्थान बड़ा होने के बावजूद सेंटर सिर्फ नौ है।

हरियाणवी संस्कृति भी करती है खिलाडिय़ों को मजबूत

हरियाणा और पंजाब के खिलाडिय़ों के दम खम के पीछे इन राज्यों के कृषि वाली संस्कृति का भी बड़ा रोल है। हरियाणा और पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है। यहां पर सालभर लोग अपने खेतों में काम करते है। इसलिए यहां के शारीरिक रूप से बड़े मजबूत होते है। हरियाणा के खिलाड़ी उन खेलों मों प्रतिनिधित्व अधिक करते है जहां पर शारीरिक दमखम की जरूरत होती है। इन दोनों राज्यों सें पहलवान, बाक्सर अधिक निकलते है। अगर दूसरे राज्य भी हरियाणा और पंजाब की तरह ही खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन दे तो वह दिन दूर नहीं जब ओलंपिक में सबसे अधिक पदक भारत के होंगे।

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