देश की पहली महिला जज बनकर अन्ना चांडी ने लड़ी थी महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ाई, आसान नहीं था ये सफर

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आज महिलाएं अनेकों क्षेत्र में अपनी काबिलियत का परिचय दे रही हैं। बेशक कड़े संघर्ष के बाद लेकिन आज महिलाएं भी अपने सपनों को पूरा कर रही हैं। लेकिन महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने का श्रेय एक महिला को भी जाता है जो भारत की पहली महिला जज थी। इस महिला जज का नाम अन्ना चांडी था। अन्ना चांडी ने महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। अन्ना ने समय-समय पर महिलाओं के प्रति लोगों का नजरिया बदलने का प्रयास भी किया है। लेकिन अन्ना के लिए ये सब करना आसान नहीं था। आइए जानते हैं अन्ना चांडी के इस सफर से जुड़ी कुछ खास बातें।

बचपन से ही वकालत के क्षेत्र में नाम कमाना चाहती थी अन्ना

आज हम आपको भारत की पहली महिला जज अन्ना चांडी के बारे में बताने जा रहे हैं। आज भी अन्ना अनेकों महिलाओं के लिए उनकी प्रेरणा स्त्रोत हैं। अन्ना का जन्म 1905 में केरल के त्रिवेन्द्रम में हुआ था। अन्ना बचपन से ही वकालत के क्षेत्र में नाम कमाना चाहती थी। इसके लिए अन्ना ने वकालत के कॉलेज में दाखिला भी ले लिया। लेकिन यहाँ कॉलेज में भी अन्ना का खूब मज़ाक उड़ाया जाता था। लेकिन अन्ना ने कभी भी नकारात्मक बातों पर ध्यान नहीं दिया और अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित रखा।

वकालत की डिग्री लेने वाली राज्य की पहली महिला बनी अन्ना

बता दें कि अन्ना ने 1926 में वकालत के क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री को हासिल कर लिया और इसी के साथ वे वकालत के क्षेत्र डिग्री लेने वाली अपने राज्य की पहली महिला बन गईं। 1929 में अन्ना ने बैरिस्टर के पद पर प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया था। 1928 में एक बहस छिड़ी जिसमें मुद्दा था महिलाओं को सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिलना चाहिए या नहीं। तब टी के वेल्लु  शादीशुदा महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ थे तब अन्ना ने स्टेज पर चढ़कर भाषण दिया और महिलाओं के हित में एक से बढ़कर एक दलील देने लगीं।

1948 में मिला था जज का पद

1937 में अन्ना को मुंसिफ़ के तौर पर नियुक्ति मिली थी और इसके बाद 1948 में अन्ना देश की पहली महिला जज बन गईं। 1959 में अन्ना को केरल के उच्च न्यायालय में नियुक्त किया गया। इसके बाद अन्ना को भारतीय उच्च न्यायालय में भी काम करने का मौका मिला। उच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त होने के बाद अन्ना को लॉ कमीशन ऑफ इंडिया के पद पर नियुक्त किया गया। इसी के बाद अन्ना ने महिलाओं के अधिकारों के लिए और भी प्रयास करने शुरू कर दिये। 1996 में इस महान महिला का निधन हो गया।

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