Monday, June 14, 2021

ऐसा कहां होता है भाई, आईआईटी से की पढ़ाई, अब बिना जमीन के खेती करके कर रहे लाखों की कमाई

Must Read

नई दिल्ली : भारत (india) में कई ऐसी अजब और गजब चीजे हमे देखने को मिलती है। जिस पर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है। ऐसा ही एक कमाल आईआईटी मुंबई (iit mumbai )से पासआउट हो स्टूटेंडट्स कर रहे है। दोनों ने पिछले तीन साल से हाइड्रोपोनिक सिस्टम पर काम करते हुए बिना जमीन के ही लाखों रुपए की कमाई कर ली है। इस सिस्टम से वह बिना जमीन के फल और सब्जियों की खेती करते है। दोनों ने कोटा (kota ) और भीलवाड़ा  (Bhilwara )में फार्म लगाए है।

आईआईटी मुंबई में ही दोनों की दोस्ती

अभय (abhay )मूलरूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले है। उनकी पढ़ाई लिखाई राजस्थान में हुई। अमित (amit ) गंगानगर (ganganagar )के रहने वाले है। दोनों ने साल 2010 में आईआईटी मुंबई में दाखिला लिया। वहीं पर दोनों की दोस्ती हुई। दोस्ती भी ऐसी हुई कि वह बिजनेस पार्टनरशिप में बदल गई। दोनों अब साथ मिलकर बिजनेस में लाखों रुपए की कमाई कर रहे है।

साल 2017 में दोनों ने छोड़ दी जॉब
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ने एक साथ जॉब पकड़ी और एक साथ ही जॉब छोड़ दी। वह राजस्थान (rajasthan )के गांवों में जाकर रिसर्च करने लगे। वह आर्गेनिक फार्मिंग करने वाले किसानों से मिले। वहां उन्हें जैविक खेती करने वाले किसानों की परेशानियों के बारे में जानकारियां मिली। साल 2018 में दोनों ने अपने घर की छत पर हाइड्रोपोनिक तकनीकी से खेती की शुरुआत की। छत पर पालक, भिंडी, टमाटर और लौकी की खेती को शुरू किया।

शुरुआत में नहीं हुआ फायदा
इस तरह से खेती करने में शुरुआत में बिल्कुल भी मुनाफा नहीं हुआ। पहले उन्होंने मिट्टी की जगह कोकोपीट का प्रयोग किया। वह छह माह में इसको बदल देते। कई रिसर्च के बाद उन्होंने ग्रोइंग चैंबर तैयार किया। जिसमें उनको कोकोपीट की जरूरत नहीं पड़ती थी। दो साल पहले ही साल 2019 में दोनों ने मिलकर एक कंपनी बनाई। कोटा में जमीन खरीदी। 25 लाख रुपए खर्च करके पॉलीहाउस तैयार किया। हाइड्रोपोनिक सिस्टम डेवलप करके ग्रोइंग चैंबर्स लगा दिए। इससे खेती की लागत भी कम हो गई। उनकी पैदावार भी बढ़ गई।

अब 40 लोग करते है उनकी टीम में काम
अब इनकी टीम में 40 लोग काम करते है। वह राजस्थान से बाहर भी अपना फार्म लगाने वाले है। वह दिल्ली और मुंबई में भी यही काम शुरू करने की कोशिश कर रहे है। ताकि अपने जैविक खेती के काम को बढ़ा सके। उनका लक्ष्य हर माह 40 लाख का कारोबार करना है। इस तकनीक का जमीन में इस्तेमाल नहीं होता है। पौधो के लिए जरूरी चीजे वॉटर मिडियम से उपलब्ध नहीं कराई जाती है। इसमें मिट्टी की जगह कोकोपीट नारियल के वेस्ट से तैयार फाइबर का इस्तेमाल किया जाता है। पौधों को मिनरल्स के जरिए पानी दिया जाता है।

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest News

बेकार कबाड़ से बना दिए छोटे वाहन, सुविधाओं में बड़ी गाडिय़ों को भी करते है फेल 

New delhi: आवश्यकता अविष्कार की जननी है। ऐसा हम बचपन से सुनते आ रहे है, लेकिन इसको कभी देख...

More Articles Like This

The Citymail - Hindi