इस IAS अफसर का 16 फ्रेक्चर और 8 सर्जरियों के बाद भी नहीं टूटा हौंसला, जानिए झुग्गी में रहने से लेकर IAS बनने तक का सफर

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कहते हैं कि हर किसी की ज़िंदगी में लाखों समस्याएँ आती हैं लेकिन कुछ लोग इन समस्याओं का के सामने घुटने टेक देते हैं और कुछ लोग सामना कर अपने मुकाम को हासिल करते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी ज़िंदगी में अनेकों समस्याएँ आई लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आईएएस बनने का सफर भी इस आईएएस अफसर के लिए बिल्कुल आसान नहीं था लेकिन अपने मजबूत इरादों और बुलंद हौंसलों से उन्होंने इस सफलता को हासिल किया और लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गईं। आइए जानते हैं IAS अफसर उम्मुल खेर की कहानी।

कभी झुग्गियों में रहना था मजबूरी

यह कहानी है आईएएस अफसर उम्मुल खेर की। उम्मुल का जन्म राजस्थान में हुआ था लेकिन बाद में वह पिता के साथ दिल्ली आ गई थी। उम्मुल के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उम्मुल के परिवार में तीन  भाई बहन थे। उम्मुल की माँ निजी कंपनी में नौकरी कर घर का गुज़रा करती थी लेकिन बीमारी के चलते उनकी यह नौकरी भी छूट गई। जिसके बाद परिवार दिल्ली आकर झुग्गियों में रहने लगा लेकिन कुछ समय बाद वह झुग्गियाँ भी तोड़ दी गई और उम्मुल का परिवार एक किराये के मकान में रहने लगा।

UPSC
फोटो-इंस्टाग्राम/UmmulKher

उम्मुल ट्यूशन पढ़ाकर चलाती थी घर का गुजारा

परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उम्मुल ने भी बहुत कम उम्र में ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया था। उम्मुल बचपन से ही पढ़ने में बहुत होशियार थी। उम्मुल ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक को पूरा किया। उसके बाद कठिन परीक्षा को पास करते हुए उम्मुल ने जेएनयू में दाखिला लिया और वहाँ से एमए और पीएचडी को पूरा किया। इसी के साथ-साथ उम्मुल यूपीएससी की तैयारी भी कर रही थीं।

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फोटो-इंस्टाग्राम/UmmulKher

16 फ्रेक्चर और 8 सर्जरी के बाद भी नहीं टूटा हौंसला

दरअसल उम्मुल फ्रेजाइल डिसऑर्डर से ग्रसित हैं जिसमें     हड्डियाँ इतनी नाज़ुक होती हैं कि जल्द ही टूट जाती हैं। इस बीमारी में शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। जिसके कारण उम्मुल ने भी बचपन में ही 16 फ्रेक्चर और 8 सर्जरियों का दर्द सहन किया है लेकिन इसके बावजूद उम्मुल ने कभी हार नहीं मानी। 2014 में उम्मुल का चयन जापान के अंतर्राष्ट्रीय लीडरशिप ट्रेनिंग प्रोग्राम में हुआ जिसमें चयनित होने वाली उम्मुल चौथी भारतीय हैं।

Ummul Kher
फोटो-इंस्टाग्राम/UmmulKher

पहले ही प्रयास में हासिल की सफलता

उम्मुल यूपीएससी के साथ-साथ जेआरएफ़ की तैयारी भी कर रही थी। यूपीएससी की तैयारी के लिए भी उम्मुल जी जान से मेहनत करने लगीं। उनकी मेहनत कुछ इस तरह रंग लाई कि उम्मुल ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी को पास कर लिया। परीक्षा में उन्हें 420वीं रैंक मिली। आज उम्मुल अनेकों लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन चुकी हैं।

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