Sunday, June 20, 2021

गुजरात के इस लडक़े ने बदल दी नागालैंड के इस गांव की सूरत, गांधी के नाम से हुए फेमस

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NEW DELHI: अक्सर गांव में बसे हुए लोग अपने गांव को बदलने की दिशा में उस तरह से काम नहीं कर पाते है। जैसा कि बाहर से आया कोई व्यक्ति कर देता है। ऐसा ही गुजरात के एक लडक़े ने 23 साल की उम्र में किया। उन्होंने 23 साल की उम्र में अपना घर छोड़ दिया। वह नागालैंड के चूचयिमलांग गांव में जाकर बस गए। इनका नाम था नटवर सिंह ठक्कर।

NATWAR SINGH THAKKAR
फोटो – screengrab /NEWJ Garv

गांव के हालात थे अधिक खराब

नटवर सिंह ठक्कर पहाड़ो पर बसे गांव चूचयिमलांग में गए थे।  यह साल 1955 का समय था। उस समय गांव के हालात काफी खराब थे। उग्रवादियो और सेना के बीच में झड़पे आम बात थी। इन झड़पों में सबसे अधिक गांव के लोगों का खून बहता था। हर साल झड़प में कई लोग मारे जाते थे। ऐसे में गांव के लोगों को अहिंसा का रास्ता दिखाने के लिए ठक्कर ने गांधी आश्रम की स्थापना की।

NATWAR SINGH THAKKAR
फोटो – screengrab / NEWJ Garv

उग्रवादियों को लगते थे सेना के जासूस

नटवर सिंह उग्रवादियों को सेना के जासूस लगते थे। जिसके कारण वह उनके आश्रम को बंद कराने का प्रयास करते थे। उनकी नटवर सिंह से काफी झड़पे हुई। लेकिन नटवर सिंह ने अपना काम बंद नहीं किया। वह लगातार गांव के लोगों को मुख्य धारा से जोडऩे का प्रयास करते रहे। उन्होंने अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए उग्रवादियों की एक भी नहीं सुनी।

NATWAR SINGH THAKKAR
फोटो – screengrab / NEWJ Garv

गांव वालों को दिया छोटे छोटे उद्योगों का ज्ञान

नटवर सिंह ठक्कर ने गांव वालों को छोटे छोटे उद्योगों का ज्ञान दिया। ताकि वह गलत रास्ते पर न जाए। इसके बाद वह आश्रम में गांव के बच्चों को पढ़ाने लगे। उनको वोकेशनल कोर्स कराने लगे। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भी नटवर के काम की तारीफ की। साल 1999 में उनको पद्मश्री से सम्मानित किया गया। नटवर ने पूरी जिदंगी नागालैंड के गांव के लिए समर्पित कर दी। साल 2018 में उनका निधन हो गया

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