Wednesday, June 23, 2021

तो इस तरह ध्यानसिंह से ध्यानचंद बन गए हाकी के जादूगर, हिटलर ने भी तारीफ करके सेना में शामिल होने का दिया था ऑफर

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NEW DELHI  : अभी तक देश या दुनिया में हाकी का जादूगर एक ही खिलाड़ी को कहा गया। जिनका नाम था मेजर ध्यानचंद। जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपनी हॉकी में चुंबक चिपका रही थी। तभी तो मैदान पर गेंद सिर्फ उनकी हॉकी की तरफ भी भागती थी। हालैंड में मैच के दौरान उनकी हाकी स्टिक को तुड़वाकर देखा गया।

इस तरह से नाम रखा गया ध्यानचंद

ध्यानचंद सेना में शामिल हुए। एक दिन वह चांद की रोशनी में ही मैदान में हाकी खेल रही थे। उनको यह करता देखकर उनके दोस्त खूब हंसे। उनको कई बातों से चिढ़ाने का प्रयास किया। लेकिन ध्यानचंद ने उनकी तरफ ध्यान नहीं दिया। आपको बता दे कि ध्यानचंद का पहले नाम ध्यानसिंह था। उनकी मेहनत देखकर सूबेदार बाले तिवारी बोले तुम आगे चलकर खूब तरक्की  करोगे। आज से तुम्हारा नाम ध्यानसिंह नहीं होगा। बल्कि ध्यानचंद कहा जाएगा। तबसे वह अपने चेले को ध्यानचंद बुलाने लगे। यहीं नाम उनका आगे चलकर फेमस हो गया।

न्यूजीलैंड के लिए किया पहला दौरा

साल 1926 में सेना की हॉकी टीम न्यूजीलैंड में मैच खेलना चाहती थी। सेना के कमांडिग आफि सर ने टीम बनाने के आदेश दिए। खिलाडिय़ों की तलाश शुरू होने लगी। सेना में सबको पता था कि ध्यानचंद काफी अच्छी हाकी खेलते है। ऐसे में सेना के अफसर ने कहा कि आप न्यूजीलैंड जा रहे हो। अच्छी प्रैक्टिस करो। ऐसे में यह ध्यानचंद का पहला विदेशी दौरा रहा।

ओलंपिक जीतने के बाद ध्यानचंद का हुआ जोरदार स्वागत

साल 1928 में ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर भारतीय टीम मुंबई लौटी। स्वागत में मुंबई के डॉकयार्ड पर मालवाहक जहाजों को समुंद्र पर ही रोक दिया गया। जहाजोंं की आवाजाही भी 24 घंटे नहीं हो पाई थी। हजारों लोगों की भीड़ जुट गई। इस साल ध्यानचंद का तबादला नार्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रेविंस वजीरिस्तान कर दिया गया। जहां हाकी खेलना मुश्किल था। यह पहाड़ी इलाका था।

ध्यानचंद से विदेशी महिला ने किस करने की इजाजत मांगी

ध्यानचंद की हाकी का जादू चलने के बाद हर तरफ कोहराम मच गया था। जर्मनी की टीम ने इंडिया को संदेश भेजकर कहा कि अगर आपकी इंडिया टीम हमारे देश में आएगी तो खर्चा हम उठाएंगे। भारत और जर्मनी की टीम में कई मैच हुए। भारतीय टीम सभी मैच जीत गई। हिटलर ने भी ध्यानचंद की हाकी पर फिदा होकर उनको अपनी सेना में आने का आफर दे दिया। ध्यानचंद के खेल से इंप्रेस होकर एक विदेशी युवती ने तो उनसे किस करने की इजाजत मांगने लगी। लेकिन ध्यानचंद ने कहा कि सॉरी में शादीशुदा हो। मुझे माफ कर दे।

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