बेकार कबाड़ से बना दिए छोटे वाहन, सुविधाओं में बड़ी गाडिय़ों को भी करते है फेल 

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New delhi: आवश्यकता अविष्कार की जननी है। ऐसा हम बचपन से सुनते आ रहे है, लेकिन इसको कभी देख नहीं पाते है। क्योंकि ऐसा बहुत कम ही होता है। लेकिन केरल में इदुकी के रहने वाले अरुण कुमार ने इस बात को सही साबित कर दिया है।

Electric vehicles
फोटो -screengrab /history tv 18

बच्चों के लिए बना देते है असली वाहन 

अरूण कुमार बताते है कि एक दिन उनके बेटे का जन्मदिन था। उसने जन्मदिन पर मुझसे इलेक्ट्रोनिक गाड़ी मांगी। जब मैं इलेक्ट्रोनिक गाड़ी लेने के लिए दुकान पर गाया तो वहां रेट काफी ज्यादा थे। जो मैं वहन नहीं कर सकता था। ऐसे में मैने खुद से इलेक्ट्रोनिक कार बनाने की ठानी

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तीन महीने की मेहनत के बाद बना डाली इलेक्ट्रोनिक कार 

अरूण बताते है कि उन्होंने तीन माह की मेहनत के बाद इलेक्ट्रोनिक कार बना डाली। इसके लिए उन्होंने कोई भी जरूरत का सामान इस्तेमाल नहीं किया। बल्कि सभी सामान में कबाड़ का इस्तेमाल किया। वह बताते है कि इस इलेक्ट्रोनिक कार को बनाने में दो से ढाई हजार रुपए का खर्च आया।

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फोटो /screengrab history tv 18

इसके बाद शुरू किए दूसरे वाहन बनाना 

अरूण बताते है कि इलेक्ट्रोनिक कार बनाने के बाद उन्होंने दूसरे वाहनों को बनाने का काम किया। ताकि जो बच्चों के माता पिता महंगे वाहन नहीं खरीद सकते है। वह इन वाहनों का प्रयोग करे। वह बताते है कि उनके वाहन में बड़े वाहनों जैसी सभी सुविधाएं है।

इलेक्ट्रोनिक व्हील चेयर बनाना है सपना 

अरूण पेशे से नर्स है। वह बताते है कि मरीजों को व्हीलचेयर को लेकर सबसे अधिक परेशानी होती है। वहीं इलेक्ट्रोनिक व्हील चेयर काफी महंगी आती है। इसलिए वह अब मरीजों के लिए इलेक्ट्रोनिक व्हीलचेयर बनाना चाहते है। ताकि मरीजों के लिए सुविधा हो सके। इस काम के लिए वह जुट भी गए है।

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