कारगिल गर्ल : पहली महिला पायलट, जिसने वो कर दिखाया जो दुश्मन नहीं सोच सकता था

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New delhi : गुंजन सक्सेना, हाल में ही इन पर फिल्म भी आई थी। फिल्म को काफी पसंद भी किया गया। जी हां यह वहीं गुंंजन सक्सेना है। जिन्होंने युद्ध में दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए थे। यह किसी भी वार में हिस्सा लेने वाली पहली भारतीय महिला पायलट थी। साल 1999 कारगिल युद्ध के दौरान गुंजन केवल 25 साल की थी। गुंजन आर्मी बैकग्राउंड से आती थी। उनके पिता और भाई भी आर्मी में थे। ऐसे में गुंजन में भी आर्मी में जाने का फैसला किया।

युद्ध के शुरुआती दौर में ही श्रीनगर जाने का आदेश 

कारगिल युद्ध के शुरुआती दौर में ही गुंजन को श्रीनगर जाने का आदेश हुआ। उनकी पोस्टिंग 132 फॉरवर्ड एरिया कंट्रोल में हुई थी। आर्मी आफिसर की बेटी के लिए श्रीनगर जाना कोई मुश्किल वाला काम नहीं था। उधमपुर से श्रीनगर जाने के लिए उन्होंने अपने माता पिता को जानकारी दी। पिता ने भी बेटी का उत्साह बढ़ाया। हालांकि वह श्रीनगर के खतरों से अनजान नहीं थे। लेकिन एक आर्मी अॅाफिसर होने के नाते उन्होंने गुंजन के काम में दखल देना जरूरी नहीं समझा। गुंजन श्रीनगर के लिए रवाना हो गई।

किसी को भी नहीं था अहसास, युद्ध ले लेेगा इतना बड़ा रूप 

कारगिल युद्ध के शुरुआती दौर में किसी को भी अहसास नहीं था कि यह युद्ध इतना बड़ा रूप ले लेगा। श्रीनगर में उस समय चार हेलीकाप्टर तैनात थे। इन हैलीकाप्टर में से गुंजन चीता हैलीकाप्टर उड़ा रही थी। दस पायलटों में सें वह एकमात्र महिला थी। हालांकि महिला होने के नाते उनके साथी उपेक्षा की दृष्टि से देख रहे थे। लेकिन कुछ समय बाद ही वह इस बात को समझ गए। क्योंकि युद्ध पर भेजने से पहले पूछा जाता है क्या वह इसके लिए तैयार है।

जख्मी सिपाहियों की मदद 

गुंजन उन पायलटो में शामिल थी। जो सर्विलांस के लिए जाते थे। 13 हजार फीट की ऊंचाई पर गुंंजन अक्सर अपने हेलीकाप्टर को हैलीपैड पर उतारती थी। जोकि किसी भी नौसिखिया पायलट के बस की बात नहीं थी। क्योंकि वहां पर गोली लगने का डर रहता था। गुंजन अपनी ड्यूटी करते हुए कई बार जख्मी सिपाहियों की भी मदद करती थी। साथ ही सैनिकों के लिए दवाएं और खाना भी पहुंचाती थी।

20 दिनों में पूरे किए 10 मिशन 

पायलट गुंजन ने 20 दिनों में अपने 10 मिशन पूरे किए। जिसके बाद युद्ध में छोटे हेलीकाप्टर को हटाकर फाइटर हेलिकाप्टर लगा दिए गए थे। गुंजन आर्मी परिवार से संबंध रखती थी। माता पिता को भी उनके जोखिम भरे कामों के बारे में जानकारी थी। लेकिन उन्होंने अपने बेटी को कॅरियर चुनने की पूरी आजादी दी।

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