Wednesday, June 23, 2021

महिला होने की वजह ट्रैकिंग इंस्टीट्यूट ने दाखिला देने से कर दिया था इंकार, खुद की खोली कंपनी अब 35 महिलाओं का स्टाफ

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NEW DELHI  : कई बार आपकी जिदंगी में ऐसा मुकाम आता है जब आपको लगता है कि यह आपकी कोशिशों का अंत है। जो हार मानकर बैठ जाते है। उनके लिए अंत हो जाता है। लेकिन जब अपने हौसलों को टूटने नहीं देते है। वह हमेशा जिदंगी में आगे बढ़ते रहते है। ऐसे ही कहानी कुछ थिनलस कोरल की है। जिन्होंने अपने हौसलों को टूटने नहीं दिया। वह भारत की सबसे सफल प्रोफेनशनल ट्रैकिंग वूमेन बनी।

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फोटो – screengrab /NEWJ Garv

बचपन में हो गया मां का निधन

थिनलस कोरल की मां का बचपन में ही निधन हो गया। उन्होंने अपने पिता के साथ लद्दाख की छोटी छोटी पहाडिय़ों पर चढऩा सीखा। धीरे धीरे उनका यह शौक एक जुनून बन गया। उन्होंने ट्रैकिंग को ही अपना प्रोफेशनल बनाना चाहा। इसके लिए उन्होंने ट्रैकिंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लेने का प्रयास किया। लेकिन महिला होने की वजह से उनको किसी भी इंस्टीट्यूट ने दाखिला नहीं दिया।

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फोटो -screengrab /NEWJ Garv

हौसला टूटा, मानी नहीं हार

इंस्टीट्यूट के इस इंकार के साथ थिनलस का हौसला जरूर टूट गया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने ट्रैकिंग और माउंटनीरिंग से जुड़े हुए सभी कोर्स किए। इसके बाद लद्दाख वापिस आकर अपनी ट्रैकिंग कंपनी खोली। इस कंपनी में केवल महिला स्टाफ रखा गया। थिनलस ने बताया कि वह इस मिथक को तोडऩा चाहती थी कि महिला की वजह से ट्रैकिंग नहीं कर सकेगी। आज के समय में कंपनी में 35 का स्टाफ है।

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फोटो – screengrab / NEWJ Garv

महिला दिवस पर नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित

थिनलस कोरल को महिला दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया। वह कहती है कि सिर्फ महिला होने के नाते आपको किसी काम को करने से नहीं रोका जा सकता है। ट्रैकिंग में महिलाएं भी काफी आगे बढ़ रही है। बस हमको एक अच्छी ट्रेनिंग की जरूरत होती है।

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