Monday, June 14, 2021

कालेज की सूखी जमीन को मिनी फारेस्ट में बदला, बारिश का पानी बचाकर की पौधों की सिंचाई

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NEW DELHI: कई लोग पर्यावरण को लेकर इतना सजग होते है कि वह पर्यावरण संरक्षण को लेकर कोई भी मौका नहीं छोड़ते है। कुछ ऐसा ही पांडुचेरी के कालेज प्रिंसीपल शशिकांत दास ने किया। उन्होंने अपने कालेज कैंपस में मिनी फारेस्ट में बदल दिया। अब इस फारेस्ट में अलग-अलग तरह के तीन हजार से अधिक पेड़ है।

SHASHIKANT DAS
फोटो / THE BETTER INDIA -SHASHIKANT DAS

तीन साल पहले कालेज में हुए थे नियुक्त

शशिकांत दास तीन साल पहले पांडुचेरी के टैगोर गर्वमेंट कालेज में नियुक्त हुए थे। उन्होंने जब कुर्सी संभाली तो देखा कि कालेज का कैंपस काफी बड़ा है। लेकिन यहां पर पेड़ पौधों के नाम पर कुछ भी नहीं था। यह देखकर शशिकांत काफी हैरान हुए। उन्होंने करीब चार साल कैंपस की जमीन पर पौधे लगाने पर खर्च किए।

SHASHIKANT DAS
फोटो/ THE BETTER INDIA – SHASHIKANT DAS

तीन हजार पेड़ों से ढक गई है कैंपस की जमीन

शशिकांत दास की मेहनत की बदौलत आज कैंपस की पूरी जमीन तीन हजार अधिक पेड़ों से ढक गई है। इस जमीन पर न सिर्फ छाया देने वाले बल्कि अलग-अलग फल देने वाले पौधे भी है। कैंपस का अन्य स्टाफ भी शशिकांत की मिनी फारेस्ट को देखकर पूरी तरह से हैरान है। हालांकि कालेज के स्टूडेंट्स भी मिनी फारेस्ट को डेवलप करने में मदद की।

बारिश के पानी को करते है सिंचाई के लिए प्रयोग

शशिकांत बताते है कि पौधों को बड़ा करने में सबसे अधिक परेशानी उनको पानी देनेे की होती है। क्योंकि भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। ऐसे में पौधों की सिंचाई करना काफी मुश्किल हो जाता है। इसलिए उन्होंने बारिश के पानी को एकत्र करके पौधों की सिंचाई करने का काम किया। शशिकांत बताते है कि ऐसा करके उन्होंने एक लाख लीटर पानी को बचा लिया।

अपने दादार से मिली प्रेरणा

शशिकांत बताते है कि उन्हेंं अपने दादा ने नेचर को संवारने की प्रेरणा मिली। उनका जन्म उड़ीसा के गाजापति जिले में हुआ। वह बताते है कि उनके दादा घर के आसपास और खाली इलाकों में पेड़ लगाते थे। उस समय शशिकांत भी अपने दादा के साथ रहते थे। दादा यह भी समझाते थे कि नेचर का हमारे जीवन में योगदान है। नेचर को हम किस तरह से बढ़ावा दे सकते है।

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