Tuesday, June 22, 2021

इंदौर की पहली महिला MBBS डॉक्टर बनी भक्ति यादव, निस्वार्थ भाव से करती थीं सभी मरीजों का इलाज

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धरती पर डॉक्टर को भगवान का अवतार माना जाता है। धरती पर डॉक्टर ही हैं जो मरीज को एक नई ज़िंदगी देते हैं। लेकिन आज के समय में इस निस्वार्थ भाव के प्रोफेशन को कुछ लोगों ने सिर्फ पैसे कमाने का धंधा बना लिया है। ऐसे में कुछ ऐसी शख़्सियतों के बारे में जानना जरूरी हो जाता है, जिन्होंने इस प्रोफेशन में अपना 100 प्रतिशत दिया है और निस्वार्थ भाव से मरीजों की सेवा की है। आज हम आपको एक ऐसी ही शख्सियत के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने सही मायने में इस प्रोफेशन को सार्थक किया है और डॉक्टर की सही परिभाषा को समझाया है। आइए जानते हैं इंदौर की पहली महिला डॉक्टर भक्ति यादव की कहानी।

Dr Bhakti Yadav

महिदपुर में हुआ था भक्ति यादव का जन्म

कहानी है देश की मशहूर डॉक्टर भक्ति यादव(Dr Bhakti Yadav) की। भक्ति जी का जन्म 3 अप्रैल 1926 को महिदपुर में हुआ था। लेकिन उस वक़्त किसी को नहीं पता था कि यह बच्ची देश के लिए एक वरदान साबित होगी। भक्ति जी इंदौर की पहली महिला एमबीबीएस(MBBS) डॉक्टर बनीं और मरीजों का निस्वार्थ भाव से इलाज किया। आमतौर पर जिस उम्र में बेड से उठने तक की हिम्मत नहीं होती उस 91 वर्ष की उम्र में भक्ति जी ने अपने मरीजों का इलाज किया है।

Doctor Didi

वर्ष 1948 से कर रही हैं यह सराहनीय कार्य

भक्ति जी का मानना था कि डॉक्टरी एक ऐसा प्रोफेशन है जिसमें निस्वार्थ भाव से कार्य किया जा सकता है। भक्ति जी अपने बैच में अकेली लड़की थी जो एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थीं। सामाजिक सरोकार के विचार के साथ भक्ति जी ने 1948 से मरीजों का इलाज करना शुरू कर दिया। भक्ति जी बिना पैसे लिए अपने मरीजों का इलाज करती थीं और उन्हें ठीक करने के लिए पूरी मेहनत करती थी। 69 वर्ष के इस सराहनीय सफर में भक्ति जी ने लाखों मरीजों को ठीक किया है। भक्ति जी ने अपना क्लीनिक भी खुद ही खोला था, जिसमें वह सम्पन्न परिवार से नाममात्र फीस लिया करती थीं।

MBBS Dr Bhakti

पद्मश्री से किया जा चुका है सम्मानित

भक्ति जी ने बिना रुके और बिना थके मरीजों की दिन-रात सेवा की है। डॉ भक्ति ने करीब 1 लाख महिलाओं की डिलीवरी भी की है। 91 वर्ष की उम्र में भी भक्ति जी रुकी नहीं और निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। मीडिया से बातचीत के दौरान भक्ति जी ने कहा था कि वह अंतिम सांस तक लोगों की सेवा करना चाहती हैं। भक्ति जी को उनके सराहनीय कार्यों के लिए पद्मश्री से भी नवाजा जा चुका है। वर्ष 2017 में लंबी बीमारी के चलते भक्ति जी का निधन हो गया था।

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