बहन को मिलते थे स्कूल जाते समय ताने, दोस्त के पिता से भी लग गई थी फटकार, बने IAS

सिविल सर्विस की परीक्षा देने वाले कैंडिडेट को काफी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। कई कैंडिडेट का बैकग्राउंड भी ऐसा होता है कि किसी को विश्वास ही नहीं होता है कि यह आईएएस का मुकाम छू पाएंगे।

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बनारस (BANARAS ) के रहने वाले गोबिंद जयसवाल (GOVIND JAISWAL) बचपन में अपने दोस्तों के साथ खेलकूद किया करते थे। एक दिन गोबिंद अपने दोस्त के घर चल गए। दोस्त के पिता गोबिंद को देखते ही भडक़ गए। उन्होंने कहा तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई, यहां पर आने की। गोबिंद काफी छोटे थे। इसलिए उन्हें समझ नहीं आया कि उनको ऐसा क्यो कहा जा रहा है। ऐसा इसलिए कहा गया था कि गोबिंद के पिता नारायण जयसवाल (NARAYAN JAISWAL) रिक्शा चलाते थे।

बेहद तंगहाली मेें निकला गोबिंद का बचपन
गोबिंद का परिवार आर्थिंग रूप से काफी तंग था। उनका बचपन काफी तंगहाली में गुजरा। जब उनकी बहन स्कूल जाती थी तो लोग उन्हें ताने देते थे कि तुम्हे स्कूल जाने के बजाय लोगों के घरों में बर्तन धोने चाहिए। ताकि कुछ पैसे कमा सके। वहीं गोबिंद से कहा जाता कि तुम कितने भी बड़े बन जाओ। चलाओगे रिक्शा ही। खुद भी चलाओगे और दूसरे से भी चलवाओ।

अपनी इच्छा से दी हर परेशानी को मात

गोबिंद जयसवाल ने अपनी इच्छा से हर परेशानी का मात दे दी। खेलने कूदने की उम्र में गोबिद ने आईएएस को अपना लक्ष्य बनाया। इसके बाद उनका अधिकतर समय केवल पढ़ाई में बीतने लगा। बताया जाता है कि गोबिंद अपने घर में कान में रूई लगाकर पढ़ते थे। ताकि पड़ोस में चलने वाली प्रिटिंग मशीन से उनका ध्यान भंग न हो।

22 साल की उम्र में पास की यूपीएससी परीक्षा

गोबिंद ने 22 साल की उम्र में यूपीएससी परीक्षा (UPSC EXAM) पास कर ली। उनका 48वां रैंक हासिल हुआ। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनको एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरणा मिली थी। बचपन में एपीजे अब्दुल क लाम में अखबार बेचने का काम करते थे। लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं रोकी। गोबिंद एपीजे अब्दुल कलाम की काफी किताबे पढ़ते थे।

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