पिता को समझाने में लगे 30 मिनट, बोले मैं आईपीएस बन गया हूं, फिर भी नहीं हुआ विश्वास

यूपीएससी के कई कैंडिडे्ट ऐसे माहौल से निकलकर आते है। जिनकी कल्पना करना मुश्किल है।

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आईपीएल कुलदीप द्विवेदी भी एक ऐसे बैकग्राउंड से निकलकर आए कि किसी को भी उम्मीद नहीं थी। कुलदीप के पिता सूर्यकांत द्विवेदी लखनऊ यूनिवर्सिटी में सुरक्षाकर्मी थे। पिता का वेतन था 6 हजार रुपए। ऐसे में आसानी से समझा जा सकता है कि घर का गुजारा कैसे चलता होगा।

दिल्ली में आकर की यूपीएससी की तैयारी
कुलदीप शुरू से की पढ़ाई में काफी तेज थे। स्कूली स्तर भी उन्होंने अपनी क्लास में टॉप किया। इसके बाद वह यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली आ गए। दिल्ली में उन्होंने किराए पर कमरा तो ले लिया, लेकिन उनके पास किताबों के लिए पैसे नहीं थे। कुलदीप ने साल 2009 में इलाहबाद यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और 2011 में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढाई पूरी की। कुलदीप ने हिंदी में बीए और ज्योग्राफी में एमए किया।

रूममेट की किताबों से करते थे पढ़ाई
कुलदीप बताते है कि वह रूममेट की किताबों से ही पढ़ाई करते थे। क्योंकि किताबों को लेकर वह खर्च कर देते तो उनके पास खाने के लिए भी पैसे नहीं बचते। कुछ दिनों बाद वह और उनका रूममेट मिलकर एक लैपटॉप लेकर आ गए। पहले दो प्रयासों में कुलदीप विफल हो गए। 2013 में उन्हें सीमा सुरक्षा बल में कमांटेड के रूप में चुना गया। लेकिन वह प्रशिक्षण में शामिल नहीं हुए।

2015 में पास की परीक्षा
कुलदीप ने साल 2015 में परीक्षा पास की। उनको 242 रैंक मिला। उनके पिता को भी विश्वास नहीं हो रहा था कि उनका बेटा अफसर बन गया। पिता पुलिस में सबइंस्पेक्टर को ही सबसे बड़ा पद समझते थे। यह समझाने में कि मैं आईपीएस बन गया हूं 30 मिनट लगे।

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