पेश की सादगी की मिसाल, सीएम पद छोड़ते ही बस में बैठकर अपने घर रवाना हो लिए थे साहिब सिंह वर्मा

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नई दिल्ली : देश के राज्यों में अलग-अलग मुख्यमंत्रियों (chief ministers) ने राज किया। लेकिन कुछ ही ऐसे होंगे। जिनको जाने के बाद भी जनता याद करती होगी। ऐसे ही थे साहिब सिंह वर्मा (shaib singh verma)। जो दिल्ली के लोगों के दिलों पर राज करते थे। चट्टान सरीखी उनकी शख्सियत थी। उनके बारे में कहा जाता था कि वह जो कुछ भी ठान लेते थे उसको पूरा करके ही दम लेते थे।

sahib singh verma
एक सभा में बैठे हुए साहिब सिंह वर्मा

बड़ी साफगोई से पार्टी के सामने रखते थे अपनी बात

साहिब सिंह वर्मा बड़ी साफगोई से पार्टी के उच्चाधिकारियों के सामने अपनी बात रखते थे। वह किसी से भी डरते नहीं थे। कई बार ऐसा देखा जाता है कि मुख्यमंत्री पार्टी के उच्चपदाधिकारियों के दवाब में आ जाते है। लेकिन साहिब सिंह वर्मा बिल्कुल भी ऐसे नहीं थे। साल 1977 में उन्होंने पहला चुनाव (election)लड़ा और पार्षद चुने गए। साल 1993 में विधानसभा चुनाव जीतकर वह भाजपा सरकार में शिक्षा और विकास मंत्री बने।

 

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अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के साथ साहिब सिंह वर्मा

साल 1996 में दी मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी

पार्टी ने तीन साल बाद साहिब सिंह वर्मा को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी। वह राजनीति में पूरी तरह से निपुण हो चुके थे। साहिब सिंह करीब ढाई साल तक मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद दिल्ली की सत्ता कांग्रेस (congress news )के पास चली गई। जिसके बाद सरकार ने उन्हें केंद्र में बुला लिया। साल 1999 का लोकसभा चुनाव उन्होंने बाहरी दिल्ली सीट से दो लाख के अधिक वोटो के अंतर से जीता। वह एनडीए सरकार में श्रम मंत्री (labour minister) भी रहे। नौकरशाही पर लगाम लगाते हुए वर्मा ने कर्मचारी भविष्य निधि की दरों को कम करने से रोका।

सीएम पद से हटते ही बस में बैठकर घर गए थे वर्मा

साहिब सिंह वर्मा की एक खास बात यह थी कि जब वह मुख्यमंत्री पद से रूखसत हुए, तब उन्होंने ऐसा उदाहरण पेश किया, जोकि आज भी राजनीति मेें जिंदा है। पूर्व मुख्यमंत्री होते ही श्री वर्मा समर्थकों की नारेबाजी के बीच सीएम हाऊस से सफेद धोती कुर्ता पहने हुए निकले और वहीं पास में खड़ी दिल्ली परिवहन की बस में बैठकर अपने घर शालीमार बाग की ओर निकल लिए। सीधे तौर पर कहा जाए तो उन्होंने राजनीति में अपनी सादगी से लोगों के दिल जीत लिए थे। पूर्व मुख्यमंत्री होते ही वह सीएम हाऊस को तत्काल छोडक़र बस में बैठकर ही अपने घर गए थे। यह अपने आप में बहुत बड़ी मिसाल है, जिसे लोग आज भी याद करते हैं।

दिल्ली के किसान परिवार में हुआ था जन्म

पूर्व मुख्यमंत्री का जन्म बाहरी दिल्ली के मुंडका गांव (mundka village ) में किसान परिवार में हुआ। साहिब सिंह वर्मा की 2007 में राजस्थान में सडक़ हादसे के दौरान मौत हो गई। किसी भी इस खबर पर विश्वास नहीं हुआ। वह सीकर जिला से नीमकाथाना में एक स्कूल का भूमि पूजन करके टाटा सफारी से दिल्ली लौट रहे थे। सडक़ हादसा अलवर जिले में हुआ। उनकी गाड़ी को ट्रक ने टक्कर मार दी। जिससे उनकी मौत हो गई।

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