अपनी मर्जी से चुना ट्रक ड्राइवर का पेशा, ताने सुनकर कभी न रूकने वाले सफर पर निकली

ट्रक ड्राइवर का पेशा बड़ा ही कष्टदायी माना जाता है। क्योंकि इसमे आपको जगह-जगह भटकना पड़ता है।

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अभी तक पुरुषों को ही ड्राइवरी करते हुए देखा गया है। महिलाएं ट्रैक्सी, प्लेन चलाती हुई नजर आती है। लेकिन एक महिला ने इन बंदिशों को तोडक़र ट्रक चलाने का पेश अपनाया है। योगिता रघुवंशी भारत की पहली महिला ट्रक ड्राइवर है। योगिता के अच्छी वकील बन सकती थी। लेकिन उन्होंने ट्रक ड्राइवर का पेशा चुना।

एक घटना ने बदल दी जीवन की दिशा

योगिता (yogita ) की जिंदगी भी आम महिलाओं की तरह थी। उसे भी अपने काम काज से मतलब होता था। महाराष्ट्र (maharashtra) के नंदुरबार पली बढ़ी कॉमर्स और लॉ में डिग्री हासिल की। परिवार ने योगिता के एक अच्छा लडक़ा देखकर उसकी शादी कर दी। योगिता ने शादी के बाद अपनी पढ़ाई जारी रखी।

yogita
हाइवे पर चलता हुआ ट्रक

पति ने दी लॉ पढऩे की सलाह

योगिता के पति वकालत (advocate )से जुड़े हुए थे। उन्होंने योगिता को इसलिए लॉ (law)करने की सलाह दी। योगिता ने लॉ कालेज में दाखिला ले लिया। इस दौरान योगिता मां बन गई। उन्होंने एक बेटी और बेटे को जन्म दिया। बेटी का नाम याशिका और बेटे का नाम यशविन रखा गया। सबकुछ सही चल रहा था तभी उनकी जिंदगी में एक ऐसा हादसा हो गया, जिसके बारे में उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था। उनके पति का स्वर्गवास हो गया।

कमाई का नहीं था कोई साधन

अब योगिता जिदंगी के एक ऐसे दोराहे पर खड़ी थी। जहां से कोई भी निर्णय लेना मुश्किल था। लेकिन उन्होंने खुद को संभाला। अपनी पढ़ाई का फायदा उठाते हुए वकील के पेश में उतर आई। लेकिन इसमें तुरंत इनकम आने का कोई साधन नहीं था। साल मेें मुश्किल से एक केस मिलता था। इतने कम पैसे में बच्चों को पालना काफी मुश्किल था। बच्चों का पालन पोषण और उनकी फीस का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा था।

पति के ट्रांसपोर्ट लाइन को अपनाया
योगिता कहती है कि उनके पति पेशे से बेशक से वकील थे। लेकिन वह दूसरी तरफ ट्रांसपोर्ट (transport )का काम भी करते थे। इसलिए वकालत से कमाई नहीं होने पर उन्होंने पति के दूसरे पेशे को अपनाया। लेकिन कई लोगों को यह बिल्कुल भी रास नहीं आया। उनकी चिंता का कारण था कि ड्राइवर लाइन को समाज में अच्छा नहीं माना जाता।

योगिता ने तोड़ दिए सारे भ्रम
योगिता कहती है कि ड्राइवरी का पेशा काफी मुश्किल भी है। क्योंकि यह पेशा आपको कही भी रूकने की इजाजत नहीं देता है। आपको हमेशा चलना पड़ता है। इसलिए मैंने हमेशा चलने का निर्णय लिया। समाज के भी सारे भ्रम तोड़ दिए है।

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